यह हादसा तब हुआ जब लुधियाना, हिसार, मुक्तसर और जगरांव से आए श्रद्धालुओं का एक दल यमुना नदी की सैर कर रहा था। दोपहर के समय, केसीघाट और बंशीवट के बीच स्थित पांटून पुल के पास अचानक मोटरबोट लहराने लगी और पुल से जा टकराई। टक्कर के बाद नाव पलट गई, जिससे उसमें सवार श्रद्धालु यमुना के गहरे पानी में डूबने लगे। चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया।
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, पीएसी के गोताखोर, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। सेना की टुकड़ी को भी बचाव अभियान में शामिल किया गया। अब तक 15 लोगों को बचा लिया गया है, जिन्हें घायल अवस्था में वृंदावन के रामकृष्ण मिशन अस्पताल और मांट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। शाम तक शेष लापता श्रद्धालुओं की तलाश जारी थी, जिसमें यमुना नदी के विभिन्न हिस्सों में एनडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन जारी है। देवराहा बाबा आश्रम के समीप एक और शव मिलने की सूचना है, जिससे मृतकों की संख्या 11 हो गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा पांटून पुल को लापरवाही से हटाए जाने के दौरान हुआ, जिसकी चपेट में मोटरबोट आ गई। हालांकि, दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है और सच्चाई का पता लगाया जा रहा है। यह श्रद्धालु सुबह दो बसों में वृंदावन पहुंचे थे, जिनमें सबसे अधिक संख्या लुधियाना के यात्रियों की थी। कुल 130 श्रद्धालुओं के दो दल आए थे, जिनमें से 37 लोग इस मोटरबोट पर सवार थे।
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