मथुरा। एजूकेशन हब के नाम से विकसित कृष्ण की नगरी मथुरा में शिक्षा के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। 40 अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच से शिक्षा माफिया में अफरातफरी मची हुई है। हालात यह हैं कि पहले दिन अधिकारी जब शिक्षण संस्थान की जांच करने जाता है तो नाम कुछ लिखकर लाता है और 24 घंटे बाद ही उसी शिक्षण संस्था पर लगा बोर्ड हटाकर दूसरी शिक्षण संस्था का बोर्ड लगा दिया जाता है। शिक्षण संस्था के संचालकों की यह कारगुजारी देखकर जांच की जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। जानकारी रहे कि यह सभी शिक्षण संस्थाएं करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के दलदल में फंसी हैं और शासन के निर्देश पर अधिकारियों द्वारा इनकी जांच की जा रही है।
जनपद में कुल 561 शिक्षण संस्थाएं हैं, जिनके द्वारा समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति प्राप्त की जा रही थी। इन शिक्षण संस्थाओं की कई स्तर की जांच की जा रही है। चार फरवरी को समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर गुप्ता द्वारा शासन द्वारा तय फार्मेट की जांच के लिए जनपद के 40 अधिकारियों को जिम्मेदारी दी थी। इन अधिकारियों द्वारा विगत तीन दिन पूर्व शिक्षण संस्थाओं की जब स्थलीय जांच शुरू की तो वह चौंक गए। एक दिन जिस शिक्षण संस्था की उन्होंने जांच की, दूसरे दिन उन्हीं शिक्षण संस्था पर दूसरी शिक्षण संस्था का बोर्ड लगा मिला। जिसे देखकर अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने जब इन शिक्षण संस्थाओं के संचालकों से बातचीत की तो वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
इन अधिकारियों द्वारा विद्यालय संचालकों की इस कारगुजारी की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी है। सूत्रों के अनुसार जनपद में शिक्षण संस्थाओं के बड़े ग्रुप इस काम में सबसे आगे हैं। उनके द्वारा एक ही बिल्डिंग में 10 से 15 तक शिक्षण संस्थाएं चलाई जा रहीं हैं। ऐसी करीब 150-200 शिक्षण संस्थाएं हैं जो कि इस प्रकार के फर्जीवाड़े पर संचालित हो रहीं हैं। सीडीओ नितिन गौड़ ने बताया कि जानकारी लगने पर वह ऐसी शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।