कोसी के हिंदू इंटर कालेज मैदान पर यमुना मुक्तिकरण अभियान की दिल्ली तक की पदयात्रा की घोषणा एक ऐतिहासिक क्षण बन गई। शनिवार को महापंचायत में संतों के साथ आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर थे तो किसानों के अगुआ भानु सिंह के साथ आए अन्नदाताओं ने आंदोलन को त्रिवेणी सा प्रवाह दिया। यमुना के एक आंचल में संत, किसान और राजनेता सब थे।
यमुना मुक्तिकरण अभियान और भारतीय किसान यूनियन (भानु) की महापंचायत में यमुना के बढ़ते प्रदूषण से करोड़ों लोगों की आस्था पर चोट, किसान और ब्रजवासियों के जीवन पर संकट, जहरीली हो रही खेती, बीमार हो रहे किसानों का मुद्दा उठा।
अभियान के प्रणेता मानमंदिर बरसाना के संत रमेश बाबा ने इतिहास को सामने रखा। सनातन धर्म की विशेषताएं और भगवत नाम की ताकत से लोगों को रूबरू कराया। रमेश बाबा ने कहा कि यमुना गंगा से सौ गुना बड़ी है और यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण हैं। ब्रजवासी यमुना की अविरल धारा के लिए प्राण न्यौछावर करने को तैयार हैं। अब विजय निश्चित है।
बाबा ने पिछले आंदोलन की असफलता का राज भी यमुना भक्तों के साथ साझा किया। बोले मैं समझौते के पक्ष में नहीं था। जिसने ऐसा किया उसने दंड भी भोगा। हमने गहवरवन और पहाड़ों की लड़ाई 40 साल लड़ी और जीतने के बाद ही रुके। हम यमुना की अविरल धारा आने के बाद ही रुकेंगे। महापंचायत में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि गंगा और यमुना का प्रदूषण भारतीय संस्कृति पर प्रहार है। संत उपासना करते हैं और जरूरत पड़ने पर धरना भी कर सकते हैं।
आतंकवाद विरोधी अभियान के नायक रहे एमएस बिट्टा ने कहा कि जब यूपीए सरकार ने रामसेतु तोड़ने की बात कही तो मैने संकल्प लिया था कि सरकार के इस कदम से पहले ही बमों से बचे इस शरीर को बलिदान कर दूंगा। सरकार बदली और सोच भी बदल गई। यमुना साफ होकर रहेगी। मैं इस अभियान के साथ रहूंगा।
भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, रालोद विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह ने कहा किसानों के आने से ब्रज की भूमि पावन हो गई है। विधायक बोले हमने ये मामला विधानसभा में उठाया था। संत रमेश बाबा का संकल्प हमारा संकल्प है। गोपालपीठाधीश्वर पुरुषोत्तम लाल चतुर्वेदी की उपस्थिति से आंदोलन को और बल मिला।
पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, एमएलसी लेखराज सिंह, योगेश द्विवेदी, यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकांत शास्त्री, सुनील सिंह, किसान नेता हरेश ठेनुआं, श्योराम सिंह, रेशमपाल सिंह, अवधेश प्रताप सिंह, श्याम चतुर्वेदी, पंकज चतुर्वेदी, राजकुमार उर्फ राजू भैया, सुरेंद्र प्रधान आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता महंत फूलडोल बिहारी दास ने की। संचालन मृदुल कृष्ण शास्त्री ने किया।
ब्रज के संतों से सजा मंच
गीता मनीषा ज्ञानानंद महाराज, गोपाल पीठाधीश्वर डा. पुरुषोत्तम लाल, फूलडोल बिहारी, महामंडलेश्वर चित्प्रकाशानंद, महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज, महंत प्रहलाद दास, हरिबोल बाबा, आदित्यानंद महाराज, गौर गोपाल दास, देवस्वरूपा नंद, आचार्य बद्रीश, रामस्वरूप ब्रह्मचारी, बृजबिहारी दास, राजेंद्र शास्त्री, संजीव कृष्ण ठाकुर, देवकीनंदन ठाकुर महापंचायत में मौजूद रहे।