शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में महामना पंडित मदनमोहन मालवीय के योगदान के लिए ब्रजभूमि सदैव उनकी ऋणी रहेगी। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय गोवंश को बचाने और संरक्षण के लिए भी ब्रजवासी उनका अमूल्य योगदान भुला नहीं पाएंगे।
गोवंश संरक्षण और संवर्द्धन के लिए पंडित मदनमोहन मालवीय ने वर्ष 1935 में मथुरा-वृंदावन मार्ग पर हासानंद गोचर भूमि की स्थापना कर एक हजार एकड़ भूमि को गोचारण के लिए दान दिया।
इसके लिए उस समय उद्यमी जुगल किशोर बिड़ला, दीपचंद पोद्दार, रायबहादुर चिरंजीलाल बागला, भागीरथमल डालमिया, सॉलिसिटर प्रभुदयाल हिम्मत सिंह, परसराम पारूमल और पंडित लज्जाशंकर इसके प्रथम ट्रस्टी थे।
इसके बाद गीता प्रेस के संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार, रायबहादुर, वासुदेव सोमानी, मंगतुराम जयपुरिया, रामप्रसाद कुंजरू, लक्ष्मीनिवास बिड़ला और कृष्णलाल पोद्दार भी गोचर भूमि से ट्रस्टी के रूप में जुड़े।
गोचर भूमि के लिए महामना द्वारा दान दी गई एक हजार एकड़ भूमि आज भी गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में उनके अविस्मरणीय योगदान का स्मरण करा रही है।
हासानंद गोचरभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी, महामना मदन मोहन मालवीय के पौत्र और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गिरधर मालवीय ने बताया कि महामना के पुण्यमय प्रयासों का परिणाम यह गोचरभूमि आज ब्रज की अग्रणी गोशाला के रूप में प्रतिष्ठित है। यहां हजारों गायों की सेवा होती है।