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भगवान श्री कृष्ण सभी कलाओं से परिपूर्ण हैं-गोविंदानंद तीर्थ

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वृंदावन। परिक्रमा मार्ग स्थित श्री कृष्ण कृपा धाम में गीता मनीषी महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में आयोजित शरद उत्सव के अंतर्गत मंगलवार को विद्वत गोष्ठी का आयोजन हुआ। स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण सभी कलाओं से परिपूर्ण हैं। यद्यपि वह महारानी और रानियों के पति रूप में जाने जाते हैं किंतु इतनी रानी पटरानी होते हुए भी वे योगीराज हैं। उनके जैसा योगी आज तक न हुआ है और न कभी होगा, कृष्ण प्रत्येक प्राणी में विद्यमान हैं।
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उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने स्वयं की प्राप्ति के लिए गोपियों को महारास में बुलाया और शरद पूर्णिमा पर बंसीवट पर उनके साथ रास रचाया, किंतु यह जीवात्मा का परमात्मा से मिलन था। प्रकाशानंद महाराज ने कहा कि ब्रज में भगवान भक्तों के अनुगामी हैं वह भक्तों के पीछे चलते हैं। पुंडरीक गोस्वामी ने कहा कि भगवान का नाम, रूप, लीला और धाम यह सभी एक साथ वृंदावन में अनुभव किए जा सकते हैं।
विवेक मुनि ने कहा कि मनुष्य संतों के प्रवचन और उन पर मनन करने से भगवान की ओर अग्रसर हो सकता है। ब्रिज बिहारी दास भक्तमाली ने कहा कि जब तक मनुष्य के ऊपर भगवान की कृपा नहीं होगी, तब तक सच्चे संत का मिलन मनुष्य को नहीं प्राप्त हो सकता। मारुति नंदन बागीश, सरदार सुलोचन सिंह, महामंडलेश्वर नवल गिरी, शक्ति महाराज, विष्णु, वासुदेव शरण, देवेंद्र शर्मा, अनूप शर्मा, संजय शर्मा, रमेशचंद्र शास्त्री, राधा कृष्ण पाठक, श्रीराम मुद्गल थे।
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