पति-पत्नी फिर हुए एक
शिकवा-शिकायतों की लंबी फेहरिस्त में जिन पति-पत्नी के संबंधों की मिठास कहीं खो गई थी। अलग-अलग रहने से कोई बच्चा मां की ममता से महरूम था तो कोई बालक पिता के साये से दूर हो गया था। लोक अदालत में ऐसे 17 जोड़े एक बार फिर एक हो गए। जिला जज ने इन दंपतियों को आशीर्वाद देकर नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
लोक अदालत ने दिया सुकून
चार साल पहले भैंस के लिए बैंक से ऋण लेने वाले टैंटीगांव राम नगला निवासी बनी सिंह विकलांग हैं। कर्ज ने उनकी नींद उड़ा दी। नोटिस मिलने पर वो भी लाठी के सहारे चलकर निस्तारण के लिए लोक अदालत पहुंचे। उन्होंने बताया कि वो कर्ज चुकाकर सुकून हासिल करना चाहते हैं। ये अवसर लोक अदालत ने दिया है।
न्याय की उम्मीद में पहुंची अंजना
अंजना और चमन लाल हाईवे के किनारे टहल रहे थे कि तभी किसी कार ने टक्कर मार दी। एक्सीडेंट क्लेम के लिए लड़ते हुए तीन साल गुजर गए। लोक अदालत में मामला सूचीबद्ध हुआ तो न्याय की उम्मीद बढ़ गई। दोनों लोक अदालत पहुंचे और अफसरों के सामने अपनी पीड़ा रखी।
बैसाखी के सहारे पहुंचे टीकम
दुर्घटना से अपाहिज हुए खरौट निवासी टीकम सिंह बैसाखी के सहारे राष्ट्रीय लोक अदालत पहुंचे। उन्होंने बताया कि बीमा कंपनी पर उन्होंने 15 लाख का दावा किया था। लोक अदालत में समझौते के लिए आए हैं।
गांव बठैन निवासी नत्थो न्याय की आस में न्यायालय परिसर स्थित पार्क में बैठे हुए थे। पूछने पर बताया कि उन्होंने खेत के लिए बैंक से ऋण लिया था। एक-दो किस्त नहीं चुका पाए। इसके बाद नोटिस भेज दिया गया। लोक अदालत में निस्तारण कराने आए हैं।