मथुरा। अपराध नियंत्रण और त्वरित तफ्तीश में सीसीटीवी फुटेज पुलिस का सबसे मजबूत हथियार साबित हो रहे हैं। बावजूद इसके धार्मिक नगरी के कई संवेदनशील इलाके अब भी कैमरों की निगरानी से बाहर हैं। पुलिस कई स्थानों पर स्थानीय दुकानदारों और निजी निवासियों के कैमरों पर निर्भर है। पिछले एक साल की घटनाओं पर नजर डालें तो लूट, छिनैती के 20 फीसदी तो अपहरण और बच्चा चोरी जैसे 16 फीसदी मामले सीसीटीवी फुटेज न होने पर अभी तक अनसुलझे हैं।
सुरक्षा अंतर को खत्म करने के लिए शासन ने मथुरा-वृंदावन में सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत 5,000 से अधिक नए सीसीटीवी कैमरे लगाने की मंजूरी दी है। वर्तमान में नगर निगम और पुलिस लाइन के इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से 90 प्रमुख स्थानों पर लगे केवल 480 कैमरों से शहर की निगरानी की जा रही है। नए बस स्टैंड अंडरपास, पुराना बस स्टैंड अंडरपास, बीएसए कॉलेज मार्ग, डैंपियर नगर, चंदनवन और एटीवी जैसे अति-संवेदनशील इलाकों में अब तक सरकारी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। कई स्थानों पर खंभों पर केवल पावर बॉक्स लटके हैं, जबकि कैमरे नदारद हैं।
अपराध रोकने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं कैमरे
जिले में पिछले 12 महीनों के दौरान दर्ज आपराधिक मामलों की पड़ताल से पता चलता है कि पुलिस के लिए सीसीटीवी की भूमिका कितनी निर्णायक है। एक साल में वाहन चोरी के कुल 1200 मामले दर्ज हुए। इनमें से 65 फीसदी यानी कि 780 मामले सीसीटीवी फुटेज की मदद से सुलझाए गए जबकि 35 फीसदी यानी कि 420 मामले बिना फुटेज के अब भी लंबित हैं। चोरी और नकबजनी की एक साल में दर्ज 450 घटनाओं में से 225 मामले कैमरों से ट्रैक हुए जबकि शेष 50 फीसदी में कोई सुराग नहीं मिल सका।
लूट और छिनैती की घटनाओं के आकलन से पता चलता है कि साल भर में 85 घटनाओं में से 80 फीसदी मामले यानी कि 68 घटनाओं का खुलासा कैमरों के जरिये हुआ, जबकि 20 मामले अनसुलझे रहे। इसी तरह से अपहरण और बच्चा चोरी के अतिसंवेदनशील 25 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 84 फीसदी अर्थात 21 घटनाएं सीसीटीवी की त्वरित ट्रैकिंग से सुलझ गईं। इनके अलावा 4 मामले कैमरों की फुटेज न मिलने के कारण पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। सामने आए आंकड़ों के अनुसार पुलिस जिन मामलों को सुलझाने में सफल रही, उनमें से लगभग 40 प्रतिशत फुटेज निजी दुकानदारों के कैमरों से हासिल हुईं हैं। नए कैमरों का नेटवर्क सक्रिय होते ही मथुरा-वृंदावन का पूरा क्षेत्र अभेद्य सुरक्षा घेरे में आ जाएगा।
ऐसे लगाए जाएंगे 5000 कैमरे
सभी 5,000 कैमरे सीधे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़े जाएंगे। यह कैमरे प्राथमिकता वाले क्षेत्र जैसे प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदु, घने बाजार, बस स्टैंड/रेलवे स्टेशन अंडरपास, धार्मिक स्थल पर लगाने की तैयारी है। यह कैमरे नाइट-विजन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन और फेस रिकग्निशन तकनीक से लैस होंगे। इनसे अपराध पर नकेल कसने के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत स्वच्छता और यातायात प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।
सीसीटीवी कैमरे अपराध नियंत्रण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। पुलिस पूरी तरह से अपने सिस्टम पर निर्भर रहने के लिए तैयार है। जहां भी सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, वहां पर सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत कवर किया जाएगा।
श्लोक कुमार, एसएसपी