रेलवे की खानपान व्यवस्था पर ठेकेदार हावी हैं। लाइसेंस छह लोगों से खाने-पीने का सामान बिकवाने का है जबकि ठेकेदार ने 50 से अधिक लोगों को ट्रेनों में सामान बिकवाने के लिए लगा दिया है। आगरा से लेकर दिल्ली तक ठेकेदारों के अवैध वेंडर का जाल फैला है।
रेलवे का खानपान विभाग रेलवे स्टेशन पर खाद्य पदार्थोें का ठेका उठाता है। ट्रेन में खाने-पीने का सामान बेचने का रेलवे का अलग ठेका होता है। मथुरा जंक्शन पर 15 ठेकेदारों ने 96 लोगों के लाइसेंस बनवाए हैं। उन्हीं को रेलवे की ओर से आई कार्ड जारी किए गए हैं।
लेकिन हर ठेकेदार ने छह-सात लोगों के लाइसेंस पर 50 से 60 लोगों को ट्रेनों में सामान बेचने के लिए लगा रखा है। ठेकेदारों ने फर्जी आईकार्ड बना दिए हैं और उनके नाम से ही वर्दी पहना दी है। आगरा से लेकर दिल्ली और भरतपुर-अलवर रूट पर ठेकेदारों के लोग अवैध रूप से खाने-पीने का सामान बेच रहे हैं।
खाने की गुणवत्ता बेहद खराब
ये वेंडर घटिया खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। सिंथेटिक पेठा, पेड़ा, चाय, पानी की घटिया क्वालिटी की बोतलें मंहगे दामों में बेची जा रही हैं।
ठेकेदारों ने कुछ लोगों के नाम से खानपान बेचने का लाइसेेंस लिया है। ठेकेदारों के अधिक लोगों से अवैध रूप से सामान बिकवाने की शिकायत आती हैं। समय-समय पर होने वाली चेकिंग में अवैध वेंडर पर कार्रवाई की जाती है।
-अबना सिंह, खानपान निरीक्षक रेलवे जंक्शन