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Mathura News: एससी सम्मान पर रालोद में घमासान, लैटर बम फूटे

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अमित मुद्गल
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मथुरा। रालोद प्रमुख चौधरी जयंत ने जहां अपने विधायकों से कहा है कि वे अपनी निधि का 35 प्रतिशत हिस्सा दलितों के उत्थान और विकास पर खर्च करें तो वहीं दूसरी और पार्टी में उनके सम्मान को लेकर घमासान मच गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केपी चौधरी ने राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) त्रिलोक त्यागी पर अनुसूचित जाति विरोधी होने का आरोप जड़ते हुए उन्हें निष्कासित करने को पत्र लिख दिया है। उधर, रालोद से शिकारनपुर से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ीं पार्टी सदस्य मोनिका ने केपी चौधरी पर ही उल्टा दलितों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए पत्र जारी कर दिया।

दरअसल, यह रार मथुरा में 27 मई को हुई रालोद की कार्यसमिति बैठक से शुरू हुई। बैठक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय समेत सभी आला पदाधिकारी मौजूद थे। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश महासचिव डाॅ. सुशील ने बैठक में मौजूद अनुसूचित जाति के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों का भी उचित सम्मान करने और मंच पर स्थान देने की बात कही थी। यह मामला अब तूल पकड़ गया। पार्टी महासचिव केपी चौधरी ने इस बाबत पत्र संगठन महासचिव त्रिलोक त्यागी को एवं केंद्रीय कार्यकारिणी को पत्र लिखा और कहा कि आपके द्वारा लगातार अनुसूचित जाति के कार्यकर्ताओं का अपमान किया जा रहा है।
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डॉ. सुशील को इस बैठक में नीचे बैठाया गया। एससी एसटी आयोग के सदस्य नरेंद्र खजूरी को मंच पर उचित सम्मान और जगह नहीं दी गई। इससे पहले भी अनुसूचित जाति के पदाधिकारियों से दुर्व्यवहार की बात की गई है। केपी चौधरी ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर केंद्रीय कार्यकारिणी ने इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया तो केंद्रीय एससीएसटी आयोग के समक्ष यह मामला रखा जाएगा। साथ ही त्रिलोक त्यागी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।


हरिजन आयोग का सदस्य कहने से भारी नाराजगी
मथुरा की इस बैठक का एक वीडियो वायरल हो रहा है। डॉ. सुशील का कहना है कि इसमें त्रिलोक त्यागी नरेंद्र खजूरी को हरिजन आयोग का सदस्य बता रहे हैं। दरअसल इसी से सभी को घोर आपत्ति है। केपी चौधरी ने भी अपने पत्र में कहा है कि हरिजन कहना असंवैधानिक है। इस पर एक्शन लिया जाना चाहिए।



मामले को कुछ लोग बिना वजह तूल दे रहे हैं। इतनी बड़ी बात नहीं है। यदि कुछ गलत हुआ भी तो इस बारे में पार्टी के नेता से सीधे अपनी बात रखनी चाहिए थे। गांवों में लोग हरिजन कहते ही हैं पर धीरे धीरे बदलाव आ रहा है। चिट्ठी लिखने की आवश्यकता नहीं थी। पार्टी नेता से सीधे बात की जा सकती थी। त्रिलोक त्यागी की मंशा शायद ऐसी नहीं थी। पार्टी में अनुसूचित जाति के लोगों को पूरा सम्मान प्राप्त है। - नरेंद्र खजूरी



मैने तो एससी वर्ग के कुछ बड़े नेताओं को उचित सम्मान देने की बात कही थी। बताया था कि एससी वर्ग के लोगों का सम्मान होना चाहिए क्योंकि बैठक में काफी लोग इस वर्ग से शामिल हुए हैं। हालांकि केपी चौधरी को इस प्रकरण को पार्टी के नेता के सामने रखना चाहिए था। पत्र लिखना इसका प्रचार करना सही नहीं है। शब्दावली के सुधार पर तो सभी को काम करना ही चाहिए। हरिजन कहा जाना सही नहीं है। - डाॅ. सुशील



एससी के किसी पदाधिकारी के साथ मैने कोई दुर्व्यवहार नहीं किया। बिना वजह तूल दे रहे हैं। पूरी पार्टी में इस वर्ग का बेहद सम्मान है। मुझे पता नहीं था कि हरिजन शब्द अब प्रतिबंधित है या किसी को कष्ट पहुंचाता है। मैं आगे से इसका प्रयोग नहीं करूंगा। यह सामान्य बात है। - त्रिलोक त्यागी



यह पार्टी का आंतरिक मामला था। पता नहीं मेरा पत्र किसने लीक कर दिया है। यह पत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को मिल चुका है। वहीं इस पर निर्णय लेंगे। मुझ पर लगाए आरोप बेबुनियाद हैं। मेरे पास पार्टी में यह जिम्मेदारी नहीं है कि मैं किसी को रख सकूं या हटा सकूं। मेरे द्वारा किसी के अपमान का तो सवाल ही नहीं उठता। - केपी चौधरी
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केपी चौधरी खुद एससी वर्ग के हैं। इसके बावजूद वह इस वर्ग के लोगों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं। पार्टी प्रमुख चौधरी जयंत के सामने ही वे इस तरह की हरकत कर चुके हैं, जिस पर पार्टी सुप्रीमो ने उन्हें समझाया भी था। हम अपनी बात पार्टी प्रमुख के सामने जाकर रखेंगे और सच्चाई बयां करेंगे। - मोनिका
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