मध्यप्रदेश से दिल्ली के लिए निकली सत्याग्रह यात्रा का रूट लखनऊ में बैठे कुछ नेताओं के इशारे पर बदला गया था। पहले ‘दिल्ली चलो’ का एलान हुआ था, बाद में बदलकर ‘दिल्ली चलो वाया मथुरा’ कर दिया गया था। मंशा शासन और प्रशासन को गुमराह कर मथुरा पहुंचकर जवाहरबाग को कब्जाने की थी। रामवृक्ष और उसके समर्थक पहले भी कई दफा जवाहरबाग में विश्राम कर चुके थे। सीबीआई जांच में यह बात निकलकर सामने आ रही है।
रामवृक्ष यादव ने वर्ष 2013 में स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन का गठन किया था। उत्तर प्रदेश के साथ मध्यप्रदेश और बिहार के जनपदों में बाकायदा सदस्य बनाए गए। जब रामवृक्ष बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकार को लेकर हुए संघर्ष में कुछ हासिल नहीं कर पाया तो उसने स्वाधीन भारत सुभाष सेना का गठन कर उसका अध्यक्ष बन गया। 11 जनवरी 2014 को रामवृक्ष यादव ने मध्यप्रदेश के सागर जिले से सत्याग्रह यात्रा शुरू की। पहले यात्रा का प्रचार दिल्ली चलो के नाम किया गया। बैनर और पोस्टर भी इसी नाम से छपवाए जा रहे थे।
इसी बीच लखनऊ में बैठे कुछ नेताओं ने रामवृक्ष को सलाह दी कि वह ‘दिल्ली चलो वाया मथुरा’ का कार्यक्रम फाइनल करे। बताया जाता है कि रातोंरात कार्यक्रम बदल गया। बैनर और पोस्टर नए छपवाए गए। अब इसके पीछे क्या था? यह पूरी तरह से साफ नहीं हो सका है लेकिन बताया जा रहा है कि रामवृक्ष यादव जब मध्यप्रदेश से चला था तब ही उसने मन बना लिया था कि जवाहरबाग को घेरना है।
वह बाबा जयगुरुदेव के आश्रम की तर्ज पर ही अपना बड़ा आश्रम खड़ा करना चाहता था। उसका रूट बदलवाने के पीछे भी यही माना जा रहा है। सीबीआई ने इस बिंदु पर रामवृक्ष के करीबी राकेश गुप्ता, चंदनबोस और वीरेश यादव से पूछताछ की है। पूछताछ का मेन बिंदु यही रहा कि दिल्ली के लिए निकली यात्रा आखिर मथुरा कैसे पहुंची थी।
रामवृक्ष की मौत का वैज्ञानिक आधार जुटाने में लगी सीबीआई दोबारा डीएनए की जांच करा सकती है। बताया जा रहा है कि लखनऊ प्रयोगशाला के डायरेक्टर ने भी इस संबंध में अफसरों को पत्र भेजा है।