50 परिवारों के लोग जुड़े हैं मूर्ति निर्माण कार्य में
10 रुपये से 1200 रुपये तक की उपलब्ध हैं मूर्तियां
70 बार हाथों से गुजरती है बनाते समय एक मूर्ति
03 शहरों से लाए जाते हैं मूर्ति के लिए पक्के रंग
06 राज्यों में मथुरा की मूर्तियों की अधिक सप्लाई
250 प्रकार की डिजाइन में बनती हैं मूर्तियां
मथुरा। शहर के मोहल्ला अंबाखार में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का बाजार सज गया है। दीपावली पर ये मूर्तियां देशभर मेें पूजी जाएंगी। मोहल्ले के करीब 50 परिवार कई पीढ़ियों से मूर्ति बना रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान में यहां से मूर्तियां सप्लाई होती हैं। मूर्तियां तैयार करने के लिए फिरोजाबाद, आगरा और दिल्ली से पक्के रंग आते हैं। लॉकडाउन के चलते मूर्ति बनाने का काम देरी से शुरू हुआ, लेकिन मूर्ति कलाकारों को उम्मीद है कि दीपावली तक अच्छा कारोबार हो जाएगा।
होली गेट चौराहे से आधा किलोमीटर दूर मोहल्ला अंबाखार में बनने वाली लक्ष्मी-गणेश की मिट्टी की मूर्तियां देशभर में प्रसिद्ध हैं। मोहल्ले के करीब 50 परिवार मूर्ति बनाने का कार्य करते हैं। बच्चे, महिलाएं, युवा, बुजुर्ग सभी इस कार्य में लगे हैं। 70 वर्षीय मूर्ति कलाकार गोपाल प्रसाद बताते हैं कि पहले मूर्तियों की इतनी मांग नहीं थी, लेकिन अब बढ़ गई है। लोग लक्ष्मी-गणेश की आकर्षक और टिकाऊ मूर्ति चाहते हैं। इसलिए अब पीओपी (प्लास्टिक ऑफ पेरिस) से मूर्ति बनाई जा रही हैं। 75 वर्षीय पूरन चंद्र ने बताया कि मथुरा में लोग यहां श्रद्धा भाव से आते हैं। इसलिए यहां की बनी मूर्तियां खरीदते हैं। हालांकि आजकल मूर्ति निर्माण में यहां की मिट्टी नहीं लगती, इसका बड़ा कारण है कि यहां की मिट्टी में कंकड़ी हैं। मूर्तियों की सबसे अधिक मांग आगरा, भरतपुर, हाथरस, अलीगढ़, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, मैनपुरी, बुलंदशहर में रहती है।
करीब ढाई सौ तरह की मूर्तियां यहां बनाई जाती हैं। रंग फिरोजाबाद, दिल्ली और आगरा से लाते हैं। उत्तर प्रदेश के साथ, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश में यहां से मूर्तियां जाती हैं। दक्षिणी राज्यों के श्रद्धालु भी मूर्तियां ले जाते हैं।
- प्रेम किशोर प्रजापति, मूर्ति कलाकार अंबाखार
कोरोना काल में मूर्ति निर्माण का कार्य देरी से शुरू हो सका। दीपावली तक ही काम चलेगा। पूर्व की भांति डिमांड भी इस बार नहीं है, लेकिन लोगों की इच्छा होती है कि मथुरा से मूर्ति ले जाएं।
- राजू वर्मा, मूर्ति कलाकार अंबाखार
मूर्ति बनाने का काम कई पीढ़ियों से किया जा रहा है। मैंने अपने पिता से यह कला सीखी। पिता ने बाबा से सीखा। दीपावली पर मिट्टी के लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। छोटे साइज की मूर्तियां अधिक बिकती हैं। दस से 1200 रुपये तक की मूर्ति उपलब्ध हैं।
- रामकिशोर, मूर्ति कलाकार अंबाखार
हमारे परिवार के बच्चे भी इस कला से जुड़े हैं। 70 बार हाथों से गुजरकर एक मूर्ति तैयार होती है। कंकड़ होने के कारण मथुरा की मिट्टी का उपयोग नहीं करते। इसलिए कोलकाता से मिट्टी मंगाते हैं। पीओपी से भी मूर्तियां बना रहे हैं।
- देवीराम, मूर्ति कलाकार अंबाखार