रंगीली गलीन बिच खेल मच्यौ भारी, इत हरि उत वृषभान दुलारी।
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वसंत पंचमी से ही ढाल सजा रहे नंदगांव के हुरियारे सोमवार को प्रफुल्लित होकर बरसाना के लिए चले। कई रोज से चल रहा ढाल प्रयोग करने के अभ्यास की आज परीक्षा होनी थी। तो बच्चे क्या बुजुर्ग भी अपार उत्साह से भरे रहे। वहीं बरसाना में भी लठ के जोर का अंदाजा लगना था। जो सास अपनी बहुओं को लठ चलाने का अभ्यास करा रही थीं उनके लिए भी यह दिन उल्लास लेकर आया। नंदगांव और बरसाना दोनों में ही रंग के उत्सव छटा दिखाई दी।
रविवार को जब से बरसाना की सखियां नंदगांव के लोगों को होली खेलने का न्योता देकर आईं थीं। नंदगांव में तभी से उत्सव शुरू हो गया था। वहीं जब कन्हैया की हां का संदेश लेकर पांडा बरसाना पहुंचा तो लड्डू होली के साथ ही उत्सव का श्रीगणेश हो गया था। सोमवार को इसकी परिणति हुई बरसाना की रंगीली गली में लठामार होली के साथ।
हंसी-ठिठोली के बीच धोखे में कहीं हाथ-पैर पर भी लाठी लग गई तो वह चोट बड़ी मीठी लगी। हालांकि भाव बिल्कुल भी भक्ति रस से अलग नहीं हुए। हर गूंज में नाम सुना गया तो बस नंद के लाल और वृषभानु दुलारी का। यही आनंद आज नंदगांव में लठामार होली के बीच होगा। जब बरसाना के लोग होली खेलने के लिए नंदगांव जाएंगे।