बरसाने की गोरी फगुवा मांगन आईं, नंदभवन में पहुंच कैं गोपिन नैं खूब होरी मचाई। पौराणिक मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गोपियों को फगुवा (होली का उपहार) दिए बिना वापस लौट आते हैं तो गोपियां नाराज होती हैं। इस पर राधारानी ने अपनी सखियों को बुलाकर उनसे नंदगांव जाकर फगुवा मांगने की बात कही। इसी बहाने यह भी सोचा गया कि बरसाना में कल जो कन्हैया और उनके सखाओं पर जो लाठियां बरसी हैं, इसके बाद उनका हाल-चाल भी पता लग जाएगा। इस पर बरसाना से राधा के साथ गोपियों के टोल नंदभवन पहुंचे और कान्हा से फगुवा की मांग की। द्वापर की इसी लीला को मंगलवार को कृष्ण के गांव नंदगांव में एक बार फिर जीवंत किया गया। राधा की जगह थी उनकी पताका और गोपियों की जगह बरसाना के हुरियारे।
गलियों में मची रंग होली
नंदगांव में लठामार होली के लिए सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं ने रंग, गुलाल, अबीर लगा, होली के रसिया गाकर कान्हा के दर्शन किए। चारों ओर रंग और गुलाल से मले हुए गुलाबी, हरे और पीले चेहरे थे तो हर तरफ राधे-राधे की धुन सुनाई दी। गलियों में गुलाल और रंग की कीच जमा हो गई। श्रद्धालुओं ने इस गुलाल और रंग के मिश्रण से आनंद लिया।
मयूरी नृत्य कर सहे लाठियों के वार
नंदगांव में बरसाना के हुरियारे गोपियों से लाठियों की मार खाकर भी मतवाले होते रहे। उन्होंने लाठियां खा-खाकर मयूरी नृत्य किया। बरसाना के ग्वाल मस्ती में कहते हैं कि तनक और दै भाभी। हुरियारे राकेश श्रोत्रिय, कृष्णदयाल गौड़ आदि ने बताया कि लाठियों की मार खाने के लिए वर्ष भर इंतजार करते हैं। आज बिरज में होली रे रसिया, होली खेलन आए हैं नटवर नंद किशोर, भागन से फागुन आयौ आदि का गायन बरसाने के हुरियारों ने किया तो नंदगांव की हुरियारिन इन रसियों पर नृत्य करने लगीं।