फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अबू कासिम को मारा था समोद ने

Sat, 31 Oct 2015 08:49 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
विज्ञापन
विज्ञापन
वादीपुरा से शहीद समोद के पार्थिव शरीर के साथ आए सेकेंड लांसर जोधपुर के नायब सूबेदार सीबी सिंह ने उनकी वीरता की दास्तां सुनाई। उन्होंने बताया कि वादीपुरा के सेक्टर पांच स्थित पूंछ की पहाड़ियों पर आतंकवादी अबू कासिम और साथियों से मुठभेड़ हुई थी। समोद ने 20 लाख के इनामी आतंकी अबू कासिम को मार गिराया।
विज्ञापन


सेकेंड लांसर जोधपुर के रिटायर्ड सैनिक अशोक कुमार भी अपने को रोक नहीं पाए। उन्होंने भी मुठभेड़ में समोद की बहादुरी के बारे में बताया। बोले, अबू कासिम को गोली लगने के बाद आतंकियों की तरफ से गोलीबारी बंद हो गई थी। छह घंटे तक खामोशी बनी रही। सैनिक डटे हुए थे।

एक बार समोद ने उठकर देखना चाहा लेकिन साथियों ने रोक दिया। तभी दूसरी ओर एक आतंकी की झलक दिखी तो समोद ने उसे मारने के लिए सिर उठाया। आतंकी घात लगाए थे, उन पर फायरिंग शुरू कर दी। सेकेंड लांसर के रिटायर्ड हवलदार हरकिशन ने बताया कि अपने साथी की मौत से बौखलाए आतंकियों की ओर से समोद के सीने और सिर पर फायरिंग की गई।
विज्ञापन


ये गोलियां जैकेट और हेलमेट से टकरा कर निकल गईं। अभी समोद जवाबी फायर करते कि एक आतंकी ने साइड फायर किया, ये गोली चेहरे पर लगी। मुठभेड़ 10 दिन से चल रही है और अभी भी जारी है।


कुश्ती के बेहतरीन खिलाड़ी थे
नायब सूबेदार योगेश शर्मा ने बताया कि समोद कुश्ती के अच्छे खिलाड़ी थे। शरीर से मिट्टी लगने से पहले ही वह दांव मारकर खेल खत्म कर देते। उनका हंसमुख, हरफनमौला स्वभाव सभी को भाता। मेजर जयराम सिंह ने बताया कि कई साल से वेस्ट स्पोर्ट्समैन खिताब पर उन्हीं का कब्जा था।


‘पता नहीं था आखिरी मुलाकात है’
शहीद समोद के गांव के मित्र अमरचंद के आंसू थम नहीं रहे। उन्होंने बताया कि वह और समोद साथ पढ़े थे। गत 27 सितंबर को छुट्टी काटने के बाद वह समोद को ड्यूटी पर जाने के लिए मथुरा स्टेशन तक छोड़ने गए थे। नहीं पता था कि यह उनका आखिरी साथ होगा। अमरचंद ने बताया कि समोद को शुरू से ही सेना में जाने की चाह थी। छुट्टी पर गांव आने पर वह दोस्तों और परिवार के बीच दिल खोल कर रहता था। बोले, दोस्त की इस गौरवशाली शहादत पर गर्व है।

बेटे ने पहनी पिता की टोपी
शहीद समोद के अंतिम संस्कार के समय उसके बड़े बेटे शिवम ने चिता को मुखाग्नि देने से पहले सिर पर पिता की फौजी टोपी पहनी तो पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

हर आंख नम
शहीद समोद के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने पर हर आंख नम थी। मां मीना, पत्नी सीमा देवी, भाई प्रमोद और अन्य परिजनों के तो आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। शवयात्रा के गांव से गुजरने के दौरान अपने घर के दरवाजों पर खड़ी महिलाएं और युवतियों की आंखों से भी आंसू नहीं रुक रहे थे।

और बेटों को भी कुर्बान करने को तैयार
जवान बेटे के शहीद होने से पिता बच्चू सिंह बुरी तरह टूट चुके हैं। बावजूद इसके बोले कि देश के लिए ऐसी वीरता भरी शहादत को वह और भी बेटे कुर्बान करने को तैयार हैं।

प्रदेश सरकार ने नहीं की कोई घोषणा
शहीद समोद के अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों के बीच प्रदेश सरकार की ओर से कोई भी घोषणा नहीं किए जाने से मायूसी रही। सभी ने इस रवैये पर निराशा जताई।


सांसद हेमामालिनी ने दी श्रद्धांजलि
सांसद हेमामालिनी ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए भवनपुरा निवासी समोद कुमार को श्रद्धांजलि दी है। परिवार को भेजे शोक संदेश में उन्होंने कहा है कि उनकी शहादत पर देश को गर्व है। दुख की इस घड़ी में वे समोद कुमार के माता-पिता, पत्नी सीमा और पुत्र शिवम, नकुल के साथ हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें