कार्तिक मास में दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा के लिए तीर्थनगरी मथुरा के गोवर्धन में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रीकृष्ण पूजन पुरंदर कौ छुड़ाय लियौ। लै कै ग्वाल बाल लाल गिरिवर उठाय लियौ। आप ही खबायौ और आप ही नै खाय लियौ। गिरिवर कौ मान तीनौ लोक में बढ़ाय दियौ। इनकी शरण पड़िंगे, आज गिरिराज पूजा करिंगे...। छटा तेरी तीन लोक ते न्यारी है गोवर्धन महाराज...। आदि गीतों के साथ मंगलवार को लाखों श्रद्धालुओं गोवर्धन पूजन किया और अन्नकूट का भोग अर्पित किया।
गिरिराज पूजा के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल नगाड़ों पर नृत्य करते हुए देसी-विदेशी भक्तों की टोलियां हरिनाम संकीर्तन के साथ गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर रहीं थीं। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गिरिराज महाराज और भगवान श्री कृष्ण के जयकारे लगाते हुए पूजन किया। सभी श्रद्धालु सिर पर दूध, दही, माखन मिश्री लेकर पूजा करने तलहटी पहुंचे। करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर गोवर्धन पूजा की। गिरिराज मुकुट मुखारविंद मंदिर से दोपहर करीब एक बजे शोभायात्रा शुरू हुई।
गोवर्धन पूजा के लिए विशेष तौर पर विदेशी महिलाएं साड़ी पहन कर गोपी भेष में गोवर्धन पहुंची। रूस से आई आनंद प्रदायिनी दासी ने बताया कि वह गिरिराज पूजा के लिए गोवर्धन आती हैं। वे पांच साल से गोवर्धन पूजा- अर्चना करने आ रही हैं। विदेशी भक्त राम दास ने बताया कि उनको भारतीय संस्कृति अच्छी लगती है। वहीं जलंधर से आई रीता सिंह ने बताया वे 10 साल से लगातार गोवर्धन पूजा करने आ रही हैं। पहले गोवर्धन पूजा करने के दौरान बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब मथुरा, वृंदावन सहित पूरे ब्रज क्षेत्र में काफी सुविधाएं हो गईं हैं।
चावल, बाजरा, दालें, कढ़ी, खीर, माखन-मिश्री, गड्ड की सब्जी, पापड़, अचार, मोहन भोग, लड्डू, मिष्ठान, मेवा, पान का बीड़ा आदि सैकड़ों खाद्य सामग्री मिलाकर अन्नकूट का प्रसाद बनाया गया।