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कन्हैया की हां सुनते ही होगी लड्डुओं की बरसात

Sat, 04 Mar 2017 10:42 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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लड्डू होली के लिए आए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राधाजी ने होली का निमंत्रण लेकर सखियों को नंदगांव भेजा है। कन्हैया भी अपना संदेश भेजते हैं। होली का निमंत्रण स्वीकार है, ये शब्द जैसे ही बरसाने की सखियों के कानों में पहुंचते हैं तो होली का उल्लास शिखर को छूने लगता है। अगले ही दिन लठामार होली है, सभी इसी की तैयारी में जुट जाते हैं। 
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राधारानी के गांव बरसाने में आज लड्डू होली होगी। सुबह करीब साढ़े नौ बजे राधारानी मंदिर से सखियां निमंत्रण लेकर नंदगांव जाएंगी। यहां नंदबाबा को निमंत्रण सौंपा जाएगा। शाम को करीब पांच बजे यहां से पांडा राधारानी मंदिर पहुंचेगा और संदेश देगा कि कन्हैया ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। इसी आनंद में सराबोर बरसाने के लोग लड्डुओं की बरसात करने लगेंगे और शुरुआत हो जाएगी लड्डू होली की। सोमवार को नंदगांव के हुरियारे बरसाने की रंगीली गलियों में लठामार होली खेलने आएंगे। यहां बरसाने की हुरियारिन उनका लट्ठों से स्वागत करेंगी। 

परंपरागत लठामार होली का समूचे विश्व में डंका है। इस दिन लाखों की संख्या में देश के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं। सात मार्च को बरसाने के हुरियारे नंदगांव में लठामार होली खेलने जाएंगे। इस दिन नंदगांव के नंद चौक पर उत्सव मनाया जाएगा। आठ मार्च को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर लठामार होली होगी। इसी दिन वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में होली का आनंद बरसेगा। नौ मार्च को कन्हैया के गांव गोकुल में छड़ी मार हुरंगा होगा। मान्यता है कि गोकुल में कन्हैया का बचपन गुजरा था। ऐसे में यहां कन्हैया के साथ गोपियां छड़ी मारकर होली खेलती हैं। 13 मार्च को द्वारिकाधीश मंदिर में होली का त्योहार अपने चरम पर पहुंचेगा। ब्रज की होली का चालीस दिवसीय महोत्सव 14 मार्च को बलदेव (दाऊजी) में हुरंगे के साथ संपन्न होगा।  
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न्यौते के लिए उत्साहित हैं हुरियारे
बरसाना से होली का न्यौता लेकर सखियां नंद महल आती हैं। ये सखियां सखी संप्रदाय की हैं। पुरुष होते हुए भी ये स्वयं को स्त्री भाव से राधा की सखियां मानती हैं। बरसाना, राधाजी के आठ गांव और वृंदावन की सभी सखियां श्रीजी महल से एकत्रित होकर वृषभान जी से नंदगांव निमंत्रण लेकर जाने की आज्ञा मांगती हैं। श्रीजी  मंदिर से  पान, बीड़ा, मठरी, लड्डू, पेड़ा, बालूशाही, इत्र और हांडी में गुलाल लेकर नंदभवन आती हैं। साथ ही निवेदन करती हैं कि हे बृजराज श्रीजी व वृषभान के निमंत्रण को स्वीकारें। नंदमहल में आत्मीयता से सखियों का स्वागत किया जाता है। निमंत्रण पाकर ग्वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है और नंदभवन में सखियों और ग्वालों के बीच रसिया व नृत्य का आयोजन होता है। इसके बाद अगले दिन नंदगांव के हुरियारे होली खेलने के लिए बरसाना जाते हैं।
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