मथुरा। रिक्शा से अपने गंतव्य की ओर जाते प्रवासी मजदूर।
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मथुरा। हरियाणा बॉर्डर से प्रवासी श्रमिकों के आने का दौर अभी जारी है। कोई साइकिल के सहारे बिहार के लिए निकला है तो कोई ढेला पर परिवार को लेकर पटना और छपरा जा रहा है। प्राइवेट बसों में भी प्रवासी श्रमिकों की बेबसी देखते ही बन रही है।
पिछले कुछ दिनों के दौरान जनपद में 70 हजार से अधिक श्रमिक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर से मथुरा होते हुए अपने घरों के लिए गुजरे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में मजदूरों को बस और ट्रेनों से भी भेजा गया है। यह दौर अभी भी जा रही है। इसके अलावा भी अनेक मजदूर अपनी मजदूरी के संसाधनों के सहारे घर के लिए निकले हैं।
करीब एक दर्जन श्रमिकों की टोली शुक्रवार को वृंदावन से ग्वालियर जाने के लिए वाहन का इंतजार करती रही। लॉकडाउन में बेबस ये श्रमिक भूखे प्यासे भी थे। कुछ यही हाल नेशनल हाईवे पर जम्मू कश्मीर से छत्तीसगढ़ के लिए निकली तीन बस में सवारों का था। एक बस में पंचर हो जाने पर सभी रुक गई थीं। इनमें सवार श्रमिक और उनके साथ महिला बच्चे भूख से व्याकुल दिखाई दिए। लॉकडाउन-4 शुरू होने के बाद इस सप्ताह जनपद से साइकिल और ठेला पर ऐसे मजदूरों की बड़ी संख्या गुजरी है।
भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीलाभूमि मथुरा में इन श्रमिकों को लोगों ने बड़ी मदद भी की। सरकारी संस्थाओं के साथ निजी तौर पर भी लोग भोजन और पानी के साथ नगद धनराशि भी प्रवासी श्रमिकों को देने मेें पीछे नहीं रहे। विकास प्राधिकरण के तत्वावधान में उज्ज्वल ब्रज की गाड़ियां प्रवासी श्रमिकों को भोजन के पैकेट और पानी की बोतल उपलब्ध करा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रवासी श्रमिकों को यहां के लोग नकद राशि भी दे रहे हैं, जिससे वे आगे के रास्ते में अपनी कुछ जरूरत को पूरा कर सकें। यह दौर पिछले आठ दिन से जारी है।