राधाकुंड। गिरिराज परिक्रमा मार्ग के छठे कोस स्थित कुसुम सरोवर कला और भक्ति का अनूठा संगम है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशेष सजावट की गई है, जिसे देखने के लिए करोड़ों भक्त पहुंच रहे हैं। इसकी अद्भुत कारीगरी और अद्वितीय सौंदर्य भक्तों को आकर्षित कर रहा है।
यह ऐतिहासिक स्थल राधाकुंड और गोवर्धन के मध्य स्थित है। महंत राधा मोहन दास सिद्ध ने बताया कि व्यास जी द्वारा रचित श्रीमद् भागवत में इस स्थान का उल्लेख है। कुसुम सरोवर भगवान कृष्ण की लीलाओं का साक्षी रहा है, जहां उन्होंने राधा की चोटी फूलों से गूंथी थी। महाराज जवाहर सिंह ने अपने पिता सूरजमल की स्मृति में इसे बनवाया था। 1675 से पहले यह एक कच्चा कुंड था, जिसे ओरछा के राजा वीर सिंह ने पक्का कराया। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रयासों से अब यह रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाता है।
कुसुम सरोवर का ऐतिहासिक महत्व
यह स्थान तीन एकड़ में फैला हुआ है। कभी यहां गुलाब, बेला और चंपा जैसे फूलों के बगीचे थे, लेकिन अब केवल बाबुल के कांटेदार पेड़ ही दिखाई देते हैं। 1982 में यहां ब्रजभाषा की पहली फिल्म की शूटिंग हुई थी। दारा सिंह द्वारा बनाई गई फिल्म ''किसान और भगवान'' भी यहीं फिल्माई गई थी। अब यहां अक्सर फिल्मों की शूटिंग होती रहती है।