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लॉकडाउन : एनएच-2 पर कोई दो दिन से भूखा तो किसी के पैर में पड़े छाले

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मथुरा। हाईवे पर रिक्शा में बैठ कर जाते लोग। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। कोराना वायरस को लेकर देश को लॉकडाउन से कारीगर और मजदूर वर्ग परेशान है। अनिश्चितता की स्थिति से परेशान हजारों लोग वाहनों के अभाव में अपने घर जाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं। दिल्ली से पलवल होते हुए काफी लोग रविवार की रात तक कोटवन बॉर्डर पर पहुंचे और मथुरा होते हुए मैनपुरी, झांसी, टीकमगढ़, बांदा, कानपुर के लिए रवाना हुए। इस दौरान कोई दो दिन से पेटभर खाना नहीं खा सका तो किसी के पैर में छाले पड़ गए हैं।
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लॉकडाउन में लोगों की सड़क पर बढ़ती भीड़ को रोकने के लिए शासन प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। रविवार की रात से सभी सीमाएं सील कर दी गई हैं। आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। आवश्यक सेवाओं के अलावा सभी वाहनों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। जो लोग रात तक जहां पहुंच गए उन्हें वहीं रोक दिया है, लेकिन मजदूर वर्ग पैदल, साइकिल अथवा रिक्शे से अपने घरों के लिए रवाना हो गया है।
सिर पर पोटली रख पैदल टीकमगढ़ जा रहीं दो वृद्ध महिलाएं
टीकमगढ़ निवासी 70 वर्षीय रामवती और 68 वर्षीय सुमित्रा दिल्ली में मजदूरी करती हैं। सोमवार की दोपहर दोनों महिलाएं दिल्ली से किसी तरह होडल तक पहुंचीं। वहां से पैदल पटरियों के सहारे कोटवन बॉर्डर पार किया ओर कोसीकलां पहुंच गईं। रामवती ने बताया कि दो दिन से उन्होंने भरपेट भोजन नहीं किया। पैर में छाले पड़ गए हैं। कोसी में समाजसेवियों द्वारा बांटे जा रहा खाना खाया है तो कुछ राहत मिली है। सिर पर सामान रखकर उन्हें घर पहुंचना है। वाहन की भी कोई व्यवस्था नहीं है। वृद्ध महिलाएं पैदल ही घर के लिए रवाना हो गई हैं।
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रिक्शे से जाएंगे 750 किलोमीटर, पत्नी बच्चे भी हैं साथ
बांदा निवासी 28 वर्षीय बाबू, 40 वर्षीय लंबू, 35 वर्षीय रामजस और डेरापुरा कानपुर निवासी 29 वर्षीय श्रीकांत दिल्ली में रिक्शा चलाते हैं। चारों रिक्शा लेकर अपने घरों के लिए रवाना हो गए हैं। चारों रविवार की शाम चार बजे रिक्शा लेकर दिल्ली से चले थे। डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पार कर रविवार की सुबह 11 बजे कोटवन बॉर्डर पार कर छाता तक पहुंचे। अभी छह सौ किलोमीटर और चलना है। बाबू, लंबू और रामजस एक ही रिक्शे में सवार हैं, जबकि श्रीकांत अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अलग रिक्शे में हैं। श्रीकांत ने बताया कि रास्ते में एक कार ने रिक्शे में टक्कर मार दी। कोटवन के पास रिक्शा ठीक कराया। रिक्शाचालकों ने बताया कि दिल्ली में उन्हें एक किलो आटा और ढाई सौ ग्राम दाल खाने के लिए मिलती थी, जो पर्याप्त नहीं थी। इस कारण अपने घर जाने के लिए रवाना हुए। कोटवन में सभी ने खिचड़ी खाई है।
12 घंटे बाद साइकिल सवार कारीगरों ने खाई खिचड़ी
फरीदाबाद की कंपनी में काम करने वाले इटावा निवासी 25 वर्षीय हिसाफिर, मैनपुरी निवासी 32 वर्षीय ताहिर, 21 वर्षीय अंकित और 35 वर्षीय इमरान रविवार की शाम साइकिल से घर जाने के लिए रवाना हुए हैं। सोमवार की दोपहर साढ़े बारह बजे चारों चौमुहां पहुंचे। कोटवन बॉर्डर पर पुलिस ने रोका और लाठियां फटकारीं तो किसी तरह बचकर निकले। रास्ते में कुछ लोग बिस्किट आदि बांट रहे थे उसे खाकर लगातार चल रहे हैं। चौमुहां पहुंचने के बाद 12 घंटे बाद एक आश्रम में खिचड़ी खाई है। साइकिल से ही घर पहुंचना है। पुलिस की सख्ती भी बढ़ गई है। किसी तरह पुलिस से बचकर घर तक जाना है।
पुलिस से बचकर आगरा तक पहुंचेंगे मेटाडोर सवार
लॉकडाउन की स्थिति में जिलों की सीमाएं सील कर दी गई हैं। ऐसे में लोग गांवों में होकर अपने घरों से जाने लगे हैं। सोमवार की दोपहर एक मेटाडोर छाता पहुंची। मेटाडोर में करीब 60 लोग सवार थे। लोगों ने बताया कि वे होडल की गढ़ी से गांव कामर, हुलवाना होते हुए कोसीकलां के बठैन गेट पहुंचे। इस रास्ते सें कोटवन बॉर्डर नहीं पड़ता है। इसी तरह के रास्तों से सभी को आगरा होते हुए विभिन्न स्थानों पर अपने घरों तक जाना है।
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