कोसीकलां में कथा व्यास का सम्मानित करते अतिथिगण। संवाद
कोसीकलां। ग्यालाल स्मृति भवन में श्रीकृष्ण गोशाला के सेवार्थ आयोजित भागवत कथा में बृहस्पतिवार को श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। अंतिम दिन कथावाचक गोवत्स राधाकृष्ण महाराज ने शुकदेव महाराज व राजा परीक्षित की कथा सुनाई।
कथावाचक ने बताया कि जब से भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला समाप्त कर गोलोक धाम गए, तभी से कलियुग का वास पृथ्वी पर हो गया। तक्षक नाग ने गंगा किनारे बैठे राजा परीक्षित को आकर डसा तो उनका शरीर जलकर भस्म हो गया। इसके बाद उन्होंने सात दिन श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोक्ष को प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। इसके सुनने से व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य जाग जाता है। इस कलियुग में यही मानव कल्याण का एक मात्र माध्यम है।
कथा के समापन पर मुख्य यज्ञमान कुश्ती संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल किशोर वार्ष्णेय, तेजवंत जैन ने कथा व्यास को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। धर्मवीर शर्मा, दिनेश बठैनियां, भगवत प्रसाद मित्तल, अवधेश गुप्ता, अन्नू वैद्य, सुभाष बांसईया, वेदप्रकाश गोयल आदि व्यवस्थाओं में जुटे रहे। अंत में भंडारे का आयोजन भी हुआ। संवाद