वृंदावन। वृंदावन की स्वच्छता और धार्मिक मर्यादा पर संत प्रेमानंद महाराज ने श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा है कि ब्रजधाम में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु स्वच्छता और अनुशासन को अपनी यात्रा का हिस्सा बनाए। धाम की सेवा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके संरक्षण और स्वच्छ वातावरण को बनाए रखना भी प्रत्येक भक्त का कर्तव्य है।
संत प्रेमानंद ने कहा कि वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली है। यह केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। ऐसे में यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का व्यवहार भी धाम की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि मंदिरों, घाटों और सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलाएं।
भोजन के दोने-पत्तल, प्लास्टिक और अन्य कचरे को निर्धारित स्थान पर ही डालें तथा सार्वजनिक स्थानों पर थूकने जैसी आदतों से बचें। संत प्रेमानंद ने कहा कि वृंदावन सेवा, साधना और सदाचार की भूमि है। यहां आने वाले लोगों को नशा, अभद्र व्यवहार, अनैतिक गतिविधियों और धार्मिक मर्यादा के विपरीत किसी भी आचरण से दूर रहना चाहिए। संयम, विनम्रता और सेवा की भावना ही सच्ची श्रद्धा की पहचान है।