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जम्बूस्वामी की प्रतिमा का प्रथम कलशाभिषेक

Thu, 03 Mar 2016 11:02 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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कृष्णानगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में भगवान जम्बूस्वामी की 18 फुट ऊंची प्रतिमा का गुरुवार को प्रथम कलशाभिषेक किया गया।
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कलशाभिषेक से पूर्व श्री भक्तामर विधान का आयोजन किया गया। जिसमें सौधर्म इंद्र, ईशान इन्द्र, आग्नेय, सान्तकुमार, कुबेर इन्द्र आदि मुख्य इन्द्र के साथ 108 जोड़ों ने भक्तामर विधान करने का सौभाग्य प्राप्त किया।

मुनिश्री विहर्षसागर ने श्री भक्तामर विधान के बारे में बताया कि यह विधान संस्कृत के जैन महाकाव्य श्री भक्तामर स्तोत्र का रूप है। यह स्तोत्र 48 श्लोक में बसंत तिलका छंद में लिखा गया है। जिसके प्रत्येक श्लोक की हर एक पंक्ति अपने में अद्भुत है। प्रत्येक पंक्ति में तन्त्र, मन्त्र आदि सब कुछ समाहित है।
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शाम को भगवान जम्बूस्वामी की महाआरती हुई। सांस्कृतिक कार्यक्रम में मयूर नृत्य भी हुआ। श्री भक्तामर विधान का और श्री जम्बूस्वामी भगवान के कलशाभिषेक का निर्देशन मुनिश्री विहर्षसागर और मुनिश्री विजयेश ने किया।
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संपूर्ण क्रियाएं विधानाचार्य जिनेन्द्र शास्त्री, पियूष शास्त्री, धरणेंद्र शास्त्री, अंशुल शास्त्री, प्रमोद जैन, सुभाषचन्द्र जैन, योगेश जैन, राजीव जैन, पीसी छावड़ा, डा. जेपी जैन, सुभाषचंद्र जैन, विशेष कुमार, पीयूष जैन, संजय जैन सिद्धक्षेत्र के अध्यक्ष सेठ विजय कुमार आदि उपस्थित रहे।
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