जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव ने बड़े सियासी संबंध स्थापित कर लिए थे। यूपी ही नहीं कई राज्यों की सियासी हस्तियों से उसके रिश्ते थे। उसके बुलावे पर कई मंत्री और नेता जवाहर बाग में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। खास बात यह है कि इन मंत्रियों की अगुवाई अधिकारियों ने ही की थी। इस संबंध में न्यायिक आयोग को भी शपथ पत्र दिए गए हैं।
ढाई साल तक जवाहर बाग पर कब्जा जमाने वाले रामवृक्ष यादव की जड़ें बहुत गहरी थीं। उसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपने संबंध स्थापित कर रखे थे। अगर ऐसा नहीं होता तो अधिकारियों ने उसे आने के साथ ही जवाहर बाग से निकाल कर बाहर कर दिया होता। लेकिन किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं हुई जो रामवृक्ष यादव के खिलाफ कोई एक्शन ले पाता।
उसने थोड़ा-थोड़ा करके पूरे बाग पर कब्जा कर लिया था। उद्यान विभाग के आफिस से लेकर जिला उद्यान अधिकारी तक के कार्यालय को अपना ठिकाना बना लिया था। प्रशासन नोटिस तो जारी करता रहा मगर जवाहर बाग में घुसकर कार्रवाई करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाया।
जबकि मार्च, 2014 में जब रामवृक्ष यहां आया था तब उसके साथ मुश्किल से दो सौ से तीन सौ लोग ही रहे होंगे। धीरे-धीरे संख्या बढ़ाकर ढाई से तीन हजार कर ली थी। दो जून को जब फोर्स जवाहरबाग में दाखिल हुई तो हिंसा हो गई। जिसमें दो पुलिस अधिकारियों समेत तीस लोगों की मौत हो चुकी है।
अब इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच चल रही है। अब तक 70 से ज्यादा शपथ पत्र दिए जा चुके हैं। पांच शपथ पत्रों में कहा गया है कि 2015 में नवंबर या दिसंबर में जवाहर बाग में एक कार्यक्रम हुआ था जिसमें लाल और नीली बत्तियों वाली गाड़ियां पहुंची थी। इनमें कई मंत्री बताए जा रहे हैं। कुछ यूपी के थे तो कुछ दूसरे राज्यों से भी आए थे। खुद अधिकारियों ने इनका इस्तकबाल किया था।
सभी ने की भागने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग
शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को छोड़कर भागने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग तेजी के साथ की जा रही है। सोशल मीडिया पर तो इस समय यह मुद्दा छाया ही हुआ है अफसरों तक भी मामला पहुंच रहा है। न्यायिक आयोग को शपथ पत्र देकर भी लोग भागने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक लंबा वक्त बीत जाने के बाद इन अफसरों पर एक्शन नहीं हो सका है।