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बड़ा परिवर्तन है, हालात सामान्य होने में लगेगा वक्त

Mon, 12 Dec 2016 10:44 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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चार्टर्ड एकाउंटेंट
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नोटबंदी देश में बड़ा परिवर्तन है। केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद आम लोगों को दिक्कत आ रही हैं। लोग रोजगार छोड़कर घंटों लाइन में लग रहे हैं। उस पर भी बैंकों में कैश न होने से जनजीवन अस्तव्यस्त है। बावजूद इसके लोगों के मन में खुशी है। उम्मीद है कि इस निर्णय से आतंकवाद और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। इसके बाद भी बड़ा सवाल ये है कि दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए अभी और कितने दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।  
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शहर के पूजा मार्केट स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित ‘फोकस’ कार्यक्रम में आम लोगों के मन में छुपे ऐसे तमाम सवालों के जवाब तलाशे गए। विशेषज्ञ चार्टर्ड एकाउंटेंट ने नोटबंदी के बाद के हालात, भविष्य की तस्वीर, निर्णय के लाभ और हानि और आमजन के सरोकारों पर फोकस करते हुए अपनी बेबाक राय रखी। सभी के अपने तर्कों कासार यही था कि नोटबंदी देश में बड़ा परिवर्तन है, लोग इसमें अभी खुद को ढालना सीख रहे हैं, हालातों के सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। 


युवा सीए तरुण गुप्ता ने कहा नोटबंदी सरकार का वंडरफुल डिसीजन है। लेकिन सिस्टम फेल हो गया है। बैंकों से कैश नहीं मिल रहा है। लोग परेशान हैं। सरकार को चाहिए कि बैंक में खातों की लिमिट तय कर दें। एफडी पर ब्याज घटने से पेंशनर्स और रिटायर लोगों की परेशानी बढ़ी है। सरकार को इस ओर भी सोचना चाहिए। 
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सीए संजीव अग्रवाल मानते हैं कि फैसले में व्यावहारिक कमियां रह र्गइं। खामियाजा आमजन उठा रहे हैं। लेकिन, इस बड़े परिवर्तन के बाद लोग सीख रहे हैं, जो दिक्कत आ रही हैं उनका समाधान इसी में है कि लोग तेजी से कैशलेस सिस्टम को जानें। घबराएं नहीं और कैशखर्च में कटौती करें। हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा।  


सीए कुलदीप अरोड़ा ने कहा कि सरकार बोली थी आतंकवाद और भ्रष्टाचार खत्म होगा। आतंकी हमले तो आज भी हो रहे हैं। भ्रष्टाचार बरकरार है। अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। 60 करोड़ लोगों के बैंकों में खाते ही नहीं हैं। ऐसे में हालात सामान्य कैसे हो सकेंगे। राजनीतिक चंदे का भी हिसाब होना चाहिए। 


सीए अमित सतीश अग्रवाल के अनुसार नोटबंदी के दूरगामी और बेहतर परिणाम आएंगे। आमजन को लाभ मिलेगा। वर्तमान में तकलीफें उठानी पड़ रही हैं लेकिन बड़े सुधार में थोड़ी परेशानी उठानी ही पड़ती है। देश आगे बढ़े इसके लिए हम सबको एक होना चाहिए। 


वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट महेश चंद्र अग्रवाल के अनुसार सरकार ने आधी-अधूरी तैयारी के साथ इतना बड़ा फैसला लिया है। इसका खामियाजा आम आदमी को उठाना पड़ रहा है। बैंकों में कैश का अभाव है। आम आदमी एक माह से परेशान है। अर्थव्यवस्था फेल हो रही है, मजदूर बेरोजगार हो रहे हैं और कारोबार बंद हैं। 


सीए अमित चौधरी ने कहा सरकार का कदम अच्छा है लेकिन सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया है। जनप्रतिनिधियों के पास बड़ी मात्रा में काला धन है लेकिन वहां कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अशिक्षित जनता से कैशलेस होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। हालात सामान्य होने में एक साल से अधिक समय लग जाएगा। 


सीए नितिन अग्रवाल ने कहा कि जिस तेजी के साथ रकम बैंकों में जमा हुई उसके अनुपात में बैंकों में कैश नहीं आया। इसी के चलते बैंकों के बाहर लंबी कतार हैं। दिसंबर के आखिर तक ये लाइनें खत्म हो जाएंगी। बैंकों में जमा धन से लोगों को आसानी से ऋण मिल सकेगा।


सीए अश्वनी खंडेलवाल ने कहा परिवर्तन में समस्याएं आम बात हैं। जब बैंक सीबीएस हुई थीं तब भी हल्ला मचा था लेकिन आज सभी को उसका लाभ मिल रहा है। कैशलेस होने में वक्त लगेगा लेकिन ये बात समझनी होगी कि अब प्लास्टिक मनी का ही इस्तेमाल करना है। आज केवल वे कारोबारी परेशान हैं जो ब्लैक मनी से कारोबार करते थे। 


सीए राज गोयल ने कहा जब जीएसटी लागू होगा तो इसका फायदा सभी को मिलेगा। ठीक इसी प्रकार नोटबंदी का लाभ भी सभी को होना है। दिक्कतें थोड़े समय की ही बात है। कैश में लेनदेन में कम होगा तो इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम कसेगी। 


सीए हरिमोहन अग्रवाल ने कहा ग्रामीण अंचल की जनता पढ़ी लिखी नहीं है। इसके चलते कैशलेस होने में वक्त लगेगा। वर्तमान हालातों को सुधरने में छह माह लग जाएंगे। लोग धैर्य रखें, इस निर्णय के बाद आम लोगों को कई रूपों में बड़ी राहत मिलेगी। 
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एक्सपर्ट कमेंट्स...
- बैंक और एटीएम से आवश्यकतानुसार ही धन निकालें। 
- प्रयास करें अधिक से अधिक भुगतान प्लास्टिक मनी से किया जाए। 
- सरकार ने खातों से धन निकासी के लिए जो लिमिट घोषित की है उसका प्रयोग भी आवश्यकता पड़ने पर ही करें।
- कैशलेस सिस्टम को समझने के लिए वक्त निकालें और अधिक से अधिक प्रयोग करें। 
- कारोबारी बिल से डीलिंग करें और चेक से ही भुगतान स्वीकार करें। 
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