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कोरोना पीड़ितों को मनोचिकित्सक देंगे संजीवनी

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सीडीओ नितिन गौड़ व्हाट्सएप वीडियो कॉलिंग के जरिए कोरोना के मरीजों और चिकित्सक के बीच वार्ता करा? - फोटो : MATHURA
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मथुरा। आइसोलेशन में लंबे समय से भर्ती मानसिक अवसाद से जूझ रहे कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए सीडीओ ने नई पहल शुरू की है। उन्होंने दिल्ली में इबास (इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमेन बिहेवियर एंड अलाइड सांइस) से जुड़े चार मनोचिकित्सकों की टीम तैयार की है। यह टीम मथुरा के कोरोना पीड़ितों से फोन पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उनकी समस्याओं को समाधान करेंगे। मनोचिकित्सकों ने दो कोरोना मरीजों से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उनकी कोरोना संबंधी समस्याओं का समाधान किया।
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कोरोना को लेकर लोग जितने शारीरिक रूप से बीमार होते हैं उससे अधिक मानसिक रूप से भी बीमार हो रहे हैं। जिसके चलते उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती चली जाती है। इसके चलते दिल्ली में कोरोना पीड़ित मरीजों की सेवा में मानसिक रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक जुटे हुए हैं। कोरोना के चिकित्सकीय कार्यों को देख रहे सीडीओ नितिन गौड़ ने कोरोना पीड़ितों की इस परेशानी को देखते हुए इबास की चार चिकित्सकों की टीम को तैयार किया है।
यह चिकित्सक नि:शुल्क कोरोना पीड़ितों का मानसिक अवसाद दूर करने का प्रयास करेंगे। इन चिकित्सकों में इबास के जूनियर रेजीडेंट डॉ. अभिषेक गर्ग, सीनियर रेजीडेंट मोहित शर्मा, सीनियर रेजीडेंट डॉ. हिमांशु सिंह तथा प्राइवेट चिकित्सक डॉ. प्रवीन त्रिपाठी हैं। शुक्रवार को इन चिकित्सकों की टीम ने दो मरीजों से बातचीत कर उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। सीडीओ ने बताया कि यह चिकित्सकों की टीम एक के बाद एक मरीज के साथ लगभग हर रोज काउंसलिंग करेगी। जिससे कोरोना मरीज मानसिक अवसाद से मुक्त हो सकेंगे।
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डॉक्टर साहब मैं बहुत परेशान हूं ठीक हो जाऊंगा या नहीं...
मुझे कोरोना है, मैं पिछले 5 दिनों से आइसोलेशन मेें हूं। मेरी एक रिपोर्ट ठीक आई है दूसरी रिपोर्ट आनी है, मैं ठीक हो पाऊंगा या नहीं। मथुरा में भर्ती 19 मरीजों में से दो मरीजों ने बृहस्पतिवार और शुक्रवार को इन मनोचिकित्सकों से बातचीत की। बातचीत में मरीजों ने यह भी पूछा कि यदि वह अब सही होकर जाते हैं तो क्या उनका परिजनों से मिलना ठीक होगा या नहीं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी या नहीं। यह सभी प्रश्नों के उत्तर चिकित्सकों ने मरीजों को दिए। जानकारी रहे कि जो चिकित्सक इन कोरोना पीड़ितों का इलाज कर रहे हैं वह उनकी बहुत बातों का उत्तर नहीं दे पाते हैं और धीरे-धीरे करके मरीज अवसाद में चले जाते हैं। इसी अवसाद से बाहर निकालने का काम मनोचिकित्सक कर रहे हैं।
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