गेहूं खरीद के सारे इंतजाम धड़ाम हो गए हैं। किसान गेहूं लेकर भटक रहे हैं। किसी केंद्र पर लेबर नहीं होने के कारण तौल बंद है तो कहीं गेहूं का उठान न हो पाने के कारण खरीद बंद है। मजबूर किसान बाजार में गेहूं बेच रहे हैं। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने जब गेहूं खरीद केंद्रों का दौरा किया तो हालात वाकई खराब मिले।
चौमुंहा का दलौता केंद्र: यहां चार दिन पहले जो गेहूं खरीदा गया था उसका भी उठान नहीं हो पाया है। लिहाजा गेहूं की खरीद नहीं हो रही। किसान परेशान हैं। वारदाना न होने के कारण तौल बंद पड़ी थी। किसान राकेश कुमार गेहूं लेकर पहुंचे थे लेकिन तौल बंद थी। उनका कहना था कि वह तीन दिन से चक्कर लगा रहे हैं।
नौहझील: यहां करीब पांच गेहूं खरीद केंद्र हैं। इन केंद्रों में से तीन पर तौल बंद पड़ी थी। किसान दुष्यंत, होशियार और रामसेवक का कहना था कि वह तीन दिन पहले गेहूं लेकर आए थे लेकिन तौल नहीं हो पाई है।
शेरगढ़: यहां के केंद्रों पर खुले में गेहूं पड़ा है। गेहूं का उठान नहीं हो पाने के कारण गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि गेहूं खरीद के सभी इंतजाम फेल हैं। किसानों कई कई दिनों से सेंटरों पर गेहूं लेकर खड़े हैं।
गोवर्धन: इस क्षेत्र में भी सहकारी समितियों के सेंटरों पर तौल बंद पड़ी है। जिस सेंटर पर तौल हो रही है वहां रफ्तार बेहद सुस्त है। बारदाने की दिक्कत है। गेहूं भरने के लिए बोरे ही नहीं हैं। किसान दाऊजी गौड़ ने बताया कि यहां गेहूं तोलने के लिए मजदूर नहीं है। गोवर्धन अनाज मंडी स्थित क्रय विक्रय सहकारी समिति के क्रय केन्द्र पर खरीद तो हो रही है लेकिन गोदाम तक नहीं पहुंच पा रहा है। केंद्र प्रभारी गोपाल प्रसाद ने बताया कि केंद्र पर अब तक दो सौ मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।
मांट: यहां भी आठ से ज्यादा सेंटर हैं। सभी सेंटरों पर तौल प्रभावित हो रही है। कहीं गेहूं का उठान नहीं हो पा रहा है तो कहीं गेहूं भरने के लिए बोरे नहीं हैं।
बांट माप विभाग ने किया सत्यापन
बांट माप विभाग ने सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर सर्वे कर उपकरणों का सत्यापन किया। वरिष्ठ निरीक्षक एएस कुशवाहा ने अडींग, गोवर्धन उप अनाज मंडी सहित अन्य सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर बांट व कांटों का सत्यापन किया।
खुले बाजार में कीमत 1530 रुपये प्रति क्विंटल
सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है लेकिन खुले बाजार में गेहूं की कीमत 1530 रुपये प्रति क्विंटल लगाई जा रही है। क्रय केंद्रों पर अव्यवस्थाओं के चलते किसान मजबूरी में मंडियों में अपनी फसल बेच रहा है।