होर्डिंग्स और यूनीपोल के नाम पर मथुरा-वृंदावन नगर पालिकाओं में करोड़ों रुपये का खेल हो रहा है। सरकारी खजाने के बजाए यह राशि पालिका प्रशासन की जेब में जा रही है। हैरानी है कि इन दोनों नगर पालिका में नए वित्तीय वर्ष के दौरान इनकी स्वीकृति ही नहीं मिली, लेकिन शहर की सभी सड़कें होर्डिंग्स और यूनीपोल से अटी हुई हैं।
360 की अनुमति पर 1000 से ज्यादा होर्डिंग्स मथुरा शहर की सड़कों पर वर्ष भर लगे रहे। इससे करीब दो करोड़ रुपये की होने वाली आय सिर्फ 55 लाख में ही सिमट कर रह गई। वृंदावन नगर पालिका ने इस घपले में मथुरा को भी पीछे छोड़ दिया है। यहां सिर्फ 150 होर्डिंग्स की अनुमति हुई, इससे करीब 2.5 लाख रुपये पालिका के खजाने में गए। जबकि होर्डिंग्स के मामले में वृंदावन पालिका मथुरा से कहीं ज्यादा आगे है।
होर्डिंग्स और यूनीपोल के इस घपले में पालिका के अफसर और जनप्रतिनिधि मालामाल हो रहे हैं। इसी कारण नए वित्तीय वर्ष में बगैर अनुमति के ही होर्डिंग और यूनीपोल शहर की सड़कों पर जमे हुए हैं। किसी ने इन्हें हटाने की जरूरत नहीं समझी है। आगरा सहित कई बाहरी ठेकेदार यहां इस क्षेत्र में जमे हुए हैं।
यह सही है कि वृंदावन में अनुमति से कई गुना ज्यादा होर्डिंग्स लगे हुए हैं। इन्हें हटाए जाने का अभियान शुरू किया जा रहा है।
- टीएन चौबे, ईओ वृंदावन नगर पालिका
मसानी क्षेत्र में गत दिवस होर्डिंग्स हटाए गए। बाकी के खिलाफ भी अभियान शुरू किया जाएगा। अभी तक नई अनुमति नहीं दी गई है।
- डा. ब्रजेश कुमार, ईओ मथुरा नगर पालिका