परिषदीय शिक्षकों के अनियमित तरीके से स्थानांतरण मामले में डीएम ने बीएसए को जांच सौंप दी है। जबकि ट्रांसफर करने वाली स्थानांतरण समिति में खुद डीएम अध्यक्ष और सीडीओ सचिव हैं। ऐसे में इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच किए जाने पर प्रश्न उठ रहे हैं।
परिषदीय शिक्षकाें के ट्रांसफर के लिए बनी स्थानांतरण समिति ने दो जनवरी को ‘शिक्षा का अधिकार (आरटीई)’ का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए 14 शिक्षकों के ट्रांसफर कर दिए थे। इनमें से चार शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र से नगर क्षेत्र में भेजा गया है। तीन शिक्षकों के स्थानांतरण में आरटीई का उल्लंघन किया गया।
जबकि एक-दो स्थानांतरण को छोड़कर सभी में आरटीई एक्ट की धज्जियां उड़ाई गई हैं। दो विद्यालयों को एकल कर दिया गया। इनमें से एक विद्यालय में ताला लगने तक की नौबत आ गई है।
इस मामले में समाचार पत्रों में छपी खबरों पर डीएम नितिन बंसल ने संज्ञान लिया। उन्होंने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि उन्होंने नगर क्षेत्र में भेजी गई एक ही शिक्षिका नीतू भार्गव केस की जांच कराने के लिए कहा है।
ट्रांसफर के साथ चहेतों को बहाली का भी लाभ
स्थानांतरण समिति ने चहेते शिक्षकों को नगर क्षेत्र में स्थानांतरण का लाभ ही नहीं दिया, शिक्षा अधिकारियों ने अपने चहेतों को नगर क्षेत्र में भेजने के लिए निलंबन से बहाली का लाभ भी दिया। बताया जा रहा है कि कुछ निलंबित शिक्षकों की बहाली नगर क्षेत्र में कर दी गई है। इसकी भी जांच कराई जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्र से नगर क्षेत्र में भेजे गए शिक्षकों के ट्रांसफर में अनियमितता की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही आरटीई का उल्लंघन होेने वाले अन्य स्थानांतरण की भी जांच होगी।
- नितिन बंसल, जिलाधिकारी
अभी शिक्षकों के स्थानांतरण संबंधी जांच किए जाने के कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। आदेश मिलने के बाद नियमानुसार जांच की जाएगी।
- शौकीन सिंह यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी