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फौजी बनने के लिए रचा था लूट का नाटक

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मथुरा। युवक की इच्छा थी कि वह फौजी में भर्ती हो जाए। इसके लिए उसने जोड़-तोड़ की कोशिशें कीं तो पता लगा कि तीन लाख रुपये में एक व्यक्ति फौज में नौकरी लगवाने का ठेका लेता है। अब उसने तीन लाख इकट्ठे करने की ठान ली और अपने ही भाई की आलमारी में रखे एक लाख रुपये से अधिक की नकदी चोरी कर ली और चार लाख से अधिक का लूट का नाटक किया। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने पूरी सच्चाई उगल दी।
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राया थाना क्षेत्र के गांव नगला जोगपुरा निवासी दीवान सिंह का पुत्र दिलीप फौज में भर्ती होना चाहता था, इसके लिए उसे पैसों की जरूरत थी, लेकिन तय मानक के हिसाब से उसकी उम्र अधिक हो चुकी थी। दिलीप ने 25 अगस्त की रात को परिजन को झांसे में लेते हुए पुलिस को लूट की सूचना दी।
बताया कि चार बदमाश छत पर उसके कमरे मेें आए और मारपीट कर तमंचा के दम पर घर की आलमारी में रखे करीब साढ़े चार लाख रुपये की लूट ले गए और उसे खेत में फेंक गए। मौके पर पहुुंचे एसएसपी गौरव ग्रोवर सहित अन्य पुलिस अधिकारियों को वारदात का घटनाक्रम संदिग्ध लगा। पुलिस ने दिलीप से कड़ाई से पूछताछ की तो वह सच उगलने को बाध्य हो गया। उसने बताया कि उसे फौज में नौकरी के लिए तीन लाख रुपये की जरूरत थी, परंतु किसी ने उसे पैसे नहीं दिए।
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इसलिए उसने लूट की योजना बनाई। दिलीप की निशानदेही पर भुस की बुर्जी से एक लाख, 41 हजार रुपये भी बरामद किए। दिलीप ने बताया कि उसने अपनी उम्र कम कराने के लिए एक आधार कार्ड भी बनवाया था। पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले युवक सुरेंद्र पुत्र राजपाल निवासी गैजरा राया को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों को पुलिस ने जेल भेज दिया।
प्रेस वार्ता में एसएसपी के अलावा एसपी देहात श्रीशचंद्र, एसपी क्राइम राधेश्याम राय, नवागत ट्रेनी आईपीएस अनिरुद्ध कुुमार, राया थानाध्यक्ष निरीक्षक सूरज प्रकाश शर्मा, स्वॉट टीम प्रभारी निरीक्षक सदुवन राम गौतम, निरीक्षक क्राइम जसवीर सिंह, नरेंद्र बाबा मौजूद थे।
पिता बोला, साढ़े चार लाख की लूट बताना
दिलीप ने पूरा नाटक रच दिया और परिजन को भी झांसे में ले लिया। दिलीप के पिता दीवान सिंह ने उसके भाई को बताया कि वह लूट एक लाख, 41 हजार न बताकर साढ़े चार लाख बताना, ताकि पुलिस बड़ी रकम होने के कारण वारदात को जल्द से खोल दे।
वारदात से सबक लें लोग
इस प्रकार की वारदात समाज को सबक देती हैं। गलत तरीके से यदि कोई व्यक्ति नौकरी पाना चाहे या फिर अन्य कोई कार्य करना चाहे तो वह अपराध के दल-दल में फंसता जाता है। दिलीप की उम्र अधिक होने के बाद भी फौज में नौकरी पाने की इच्छा ने उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
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- गौरव ग्रोवर, एसएसपी
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