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भक्तों को मिला है अमर और अखंड प्रकाश

Wed, 19 Aug 2015 11:48 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
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ठाकुर के निज धाम में उनके प्रिय ब्रज की आराधना गाती ‘रस ब्रज रज कौ’ ब्रज यात्रा की थाती का ऐतिहासिक अनुष्ठान संतों व विद्वानों के सानिध्य में संपन्न हुआ। उन्होंने पुस्तक का विमोचन कर इसे अपना आशीष दिया और ब्रज की महिमा का बखान भी किया। 16 वीं से लेकर 21 वीं शताब्दी तक की यात्रा समारोह में हुई। आइए, कुछ क्षण वहां होने की अनुभूति कीजिए।
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सांसद हेमामालिनी ने कहा कि ब्रज के बारे में विस्तृत जानने की लालसा लोगों में रहती है। इस पुस्तक में कृष्ण लीलाओं से जुड़े स्थलों का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। इसमें से वंशीवट को मैंने देखा है और भी स्थलों को देखना चाहती हूं। मेरी इच्छा है कि इन सभी पौराणिक स्थलों पर देश और विदेश के कलाकारों को बुलाकर महोत्सव कराऊं। 

‘रस ब्रज रज कौ’ ब्रज यात्रा पुस्तक का विवेचन करते हुए आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि ब्रजभूमि यहां कान्हा के प्रकट होने की साक्षी है। इसी में अपना लाला खेला खाया है। काल के प्रभाव में श्रीकृष्ण की लीला स्थलियां लुप्त हो गईं। 16 वीं शताब्दी में आचार्यों ने आकर ब्रज को पुर्नस्थापित किया।
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चैतन्य महाप्रभु, नारायण भट्ट, बल्लभाचार्य आदि ने ब्रज का खोया गौरव लौटाया। आज 21 वीं शताब्दी में वहीं कार्य ‘रस ब्रज रज कौ’ ब्रज यात्रा पुस्तक ने किया है। इसकी संरचना भी उसी अनुरूप हुई है। पुस्तक के अष्ट खंड हैं। ब्रज में ठाकुर की सेवा भी अष्टयाम है। अमर उजाला परिवार को इस सराहनीय कार्य के लिए साधुवाद देता हूं।


गोकुल के पुष्टिमार्गीय आचार्य पंकज बाबा ने बताया कि अमर उजाला ने सिद्ध कर दिया कि अखबार सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने का कार्य भी करते हैं। ब्रज के बाहर के लोगों ने भी अमर उजाला में प्रकाशित रस ब्रज रज कौ की श्रंखला को पढ़ा और सराहा। अखबार के माध्यम से ब्रज की महिमा का विस्तार हुआ।


 साध्वी मुरलिका ने कहा कि ‘रस ब्रज रज कौ’ पुस्तक के रूप में अमर उजाला ने ब्रज के भक्तों अमर और अखंड प्रकाश प्रदान किया है। यह ब्रजवासियों के लिए अपार हर्ष का विषय है। हम सब आपके बहुत कृतज्ञ हैं।  
बरसाना के विरक्त संत रमेश बाबा ने बताया कि एक बार फिर यह पुष्टि होती है कि अमर उजाला की आस्था भारतीय संस्कृति में बसी है। अमर उजाला यमुना यात्रा का अहम सहयोगी बना। 378 दिन की ब्रज यात्रा की कड़ियां प्रकाशित कीं जो अब पुस्तक के रूप में सामने आई है।
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