कोसीकलां। हजारों लोगों के साथ एकता का संदेश देने निकली सनातन एकता पदयात्रा 8वें दिन बृहस्पतिवार को सुबह 9 बजे मंडी समिति से अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ गई। इस दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिसे राष्ट्र और राम से प्रेम नहीं, हम उसके विरोधी हैं। जिन्हें वंदे मातरम बोलने में, जय श्री राम बोलने में, भारत माता की जय बोलने में तकलीफ हो रही है, वे सीधे लाहौर चले जाएं। हमें भले ही कर्ज लेना पड़े, लेकिन उनका टिकट करवा देंगे।
उन्होंने कहा कि हम मुसलमानों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जो राम और राष्ट्र का विरोधी है हम उनके विरोधी हैं। सनातन विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा कि जो भारत का खाते हैं और गुणगान विदेशियों का गाते हैं, क्या वे उनके चाचा लगते हैं। हिंदू, गीता, गंगा, संत, सनातन का विरोध करते हैं, वे अपना डीएनए जरूर टेस्ट करा लें।
जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद से हो जाइए सचेत
कोसीकलां। बरसाना के संत विनोद बाबा महाराज ने पदयात्रा की सफलता के लिए आशीर्वाद देते हुए कहा कि नेताओं को पता नहीं है कि हमारा धर्म क्या है। हमारा धर्म सनातन है, जो भगवान से आया है। हिंदू कोई धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की शैली है।
विश्व का एकमात्र हिंदू धर्म है, जो एकता का संदेश देता है। समाज के लिए जातिवाद अभिशाप है। जन्म से नहीं कर्म से वर्ण तय किए गए, लेकिन कालांतर में आपस में लड़वाने के लिए षड्यंत्र के तहत लोगों को जातिवाद में बांटा गया। बाबा महाराज ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद मुख्य समस्या है। उन्होंने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि जब तक आप इससे सचेत नहीं होंगे तब तक भारत को हिंदू राष्ट्र नहीं बना सकते। अब सांप्रदायिक भेद भूलने का समय आ गया है। इसलिए सभी संप्रदाय सनातनी बन जाएं।
समर्थ, सक्षम हिंदू राष्ट्र ही सुरक्षा की गारंटी है: राजा भैया
कोसीकलां। कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने पदयात्रा में शामिल होकर कहा कि महाराजश्री का शरीर आहत है। स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद उनका लक्ष्य एक है, हिंदुओं को जागृत करना। राष्ट्र को जातिवाद की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है।
यदि हमें अपनी सुरक्षा करनी है तो इसके लिए समर्थ एवं सक्षम हिंदू राष्ट्र बनाना होगा। उन्होंने कहा कि महाराजजी को न तो राजनीति करना है और न ही उनका किसी दल से संबंध है, वह तो सिर्फ एकता का संदेश देने निकले हैं। इस संदेश को व्यर्थ न जाने दें। वर्षों तक यह संदेश जनमानस के भीतर बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर गए, लेकिन धर्म नहीं छोड़ा।