बरसाना। ब्रज में कदम रखना और ब्रज को महसूस करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। मन मे अहंकार रहा तो ब्रज को समझ नहीं पाओगे। शुक्रवार को बरसाना में चल रही शिव महापुराण कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने इसी भाव को श्रद्धालुओं के सामने रखा। उन्होंने कहा कि ब्रज की अनुभूति ज्ञान के अभिमान से नहीं, बल्कि सरलता, प्रेम और समर्पण से होती है। मनुष्य अपने भीतर का अहंकार छोड़कर भगवान की शरण में जाता है, तभी भक्ति का वास्तविक भाव समझ में आता है।
कथा में प्रदीप मिश्रा ने उद्धव प्रसंग के जरिए समझाया कि भगवान को पाने के लिए ज्ञान का अहंकार नहीं, प्रेम चाहिए। ब्रज की गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम किसी तर्क या दिखावे पर नहीं था। उनके लिए कृष्ण ही सब कुछ थे। इसी समर्पण को उन्होंने भक्ति का सबसे सहज रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य भगवान को पाने के लिए बहुत कुछ करता है, लेकिन अपने भीतर के अहंकार को छोड़ना भूल जाता है। जब तक मन में यह भाव रहेगा कि मैं जानता हूं, मैं कर रहा हूं, तब तक भगवान की अनुभूति सहज नहीं होगी। ब्रज की धरती मनुष्य को इसी अहंकार से बाहर निकालकर प्रेम की ओर ले जाती है।
उम्मीद इंसान से नहीं, महादेव से रखो
प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जीवन में दुख का बड़ा कारण अपेक्षा है। मनुष्य अपने परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों से उम्मीद लगाता है। उम्मीद पूरी नहीं होती तो मन टूट जाता है। उन्होंने कहा कि आशा महादेव से रखनी चाहिए और विश्वास स्वयं पर। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, भगवान पर भरोसा नहीं टूटना चाहिए। कठिन समय ही यह बताता है कि भक्त का विश्वास कितना मजबूत है। यही समय मनुष्य को भीतर से मजबूत भी करता है। कथा व्यास ने कहा कि दूसरों को सीख देना आसान है, लेकिन खुद उस सीख पर चलना कठिन है। कथा का उद्देश्य केवल सुनकर घर लौट जाना नहीं, बल्कि उसके संदेश को अपने व्यवहार में उतारना है।