श्रीकृष्ण जन्भूमि और शाही ईदगाह मस्जिद
मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने से इंकार करने के मामले में मुस्लिम पक्ष की कई दलीलों पर बात बनी। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि मस्जिद में पांच वक्त की नमाज अदा होती है और वर्तमान में सभी धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। साथ ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि व ईदगाह के रास्ते भी अलग-अलग हैं। ऐसे में मस्जिद को विवादित ढांचा क्यों घोषित किया जाए।
वहीं वादी व श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप ने जिस तरह बाबरी मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किया गया था, उसे ही शाही ईदगाह मस्जिद को भी विवादित ढांचा घोषित करने का आधार बनाया था। उन्होंने कई पुस्तकों में मौजूद साक्ष्यों को भी आधार बनाया था। हालांकि शुक्रवार को हाईकोर्ट के आए निर्णय में मुस्लिम पक्ष की दलीलों पर हिंदू पक्षकार द्वारा कोर्ट में पेश साक्ष्य नाकाफी साबित हुए। इलाहाबाद हाईकोर्ट से हिंदू पक्ष को झटका लगा। कोर्ट ने मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने से इंकार कर दिया। वहीं महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
क्या बोले संत
इधर, कोर्ट के निर्णय के बाद साधू-संतों ने भी तहर-तरह की प्रतिक्रियां दी हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पक्षकार दिनेश फलाहारी ने कहा कि जब तक वरशिप एक्ट खत्म नहीं होगा, तब तक हिंदू पक्ष के हित में फैसला आना असंभव है। वहीं गुंजन शर्मा ने कहा है कि याचिका खारिज होने से हिंदू पक्ष व्यथित है। फिलहाल हाईकोर्ट को इस मामले में फिर से विचार करना चाहिए।