शरदोत्सव पर बांकेबिहारी के दर्शन को उमड़ी भीड़।
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शरदोत्सव और शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में वर्ष में एक बार होने वाले दुर्लभ दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ठाकुरजी ने श्वेत रंग की जड़ित पोशाक, मोरमुकुट और मुरली धारण कर ‘रासेश्वर’ के रूप में अपने भक्तों को अलौकिक दर्शन दिए, जिन्हें पाकर श्रद्धालु आनंद से झूम उठे।
श्वेत पिछवाई और स्वर्ण-रजत सिंहासन पर विराजे आराध्य
शरदोत्सव के विशेष अवसर पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के जगमोहन को मनमोहक सफेद रंग की पिछवाई से सजाया गया था। मध्य भाग में ठाकुर रासेश्वर श्रीबांकेबिहारी सोने और चांदी से जड़ित सिंहासन पर विराजमान हुए। उनके दोनों ओर चांदी की गोपियां सुशोभित थीं। लता-पताओं के मध्य गोपियों के साथ रास मुद्रा में विराजमान आराध्य के सिर पर मोरमुकुट, चांदी की मुरली और कमर पर लकुटी (छोटी छड़ी) सुसज्जित थी। भक्तों ने अपने लाडले आराध्य को चांदी की मुरली और लकुटी अर्पित कर अपना स्रेह और लाड प्रकट किया। मंदिर परिसर लगातार गूंजते जयकारों से गुंजायमान रहा।