मथुरा। करीब दो माह पहले शंकर हॉस्पीटल में जन्मी बच्ची की तबीयत बिगड़ने और बाद में फरीदाबाद के अस्पताल में मौत होने के मामले में जांच कमेटी ने प्रथम दृष्ट्या हाॅस्पीटल प्रबंधक को दोषी माना है। सीएमओ ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने को कहा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर हॉस्पीटल का पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डॉ. अजय कुमार वर्मा ने बताया कि चौबियापाड़ा निवासी नवीन चतुर्वेदी ने पत्नी गुंजन चतुर्वेदी को 15 अक्तूबर को शंकर हॉस्पीटल में भर्ती कराया था। गुंजन ने आॅपरेशन के बाद दोपहर करीब 2.44 बजे बच्ची को जन्म दिया। पीड़ित के अनुसार आधा घंटे बाद बच्ची का रंग नीला पड़ने लगा। आरोप है कि इसकी जानकारी देने के बाद भी चिकित्सकों ने ध्यान नहीं दिया। इस पर वे बच्ची को दूसरे अस्पताल ले गए और वहां से उसे फरीदाबाद रेफर कर दिया। अगले दिन सुबह बच्ची की मौत हो गई।
शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएमओ ने जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजीव यादव और उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसपी राठौर को जांच सौंपी। जांच रिपोर्ट में बताया है कि बच्ची को समय से सही उपचार नहीं मिला। उधर, हॉस्पीटल संचालक डॉ. पवन अग्रवाल ने बताया कि उनके अस्पताल में बच्ची की मौत नहीं हुई थी। जन्म के बाद बच्ची एकदम ठीक थी। उसके बाद तबीयत बिगड़ी तो परिजनों को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। इसमें उन्होंने देरी की। बच्ची की मौत अगले दिन अन्य हॉस्पीटल में हुई। जांच के लिए आई टीम ने जो साक्ष्य मांगे वे उपलब्ध कराए गए। मामले की पुन: जांच के लिए जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया है।