हो कैसे बदरा है रहे लाल, ओ लाल होरी कौ रंग उड़न लागौ..., ये होरी बरस दिनन में आवत है, कोई माल मिठाई खावत है, कोई गावत दै-दै ताल ओ ताल..., ऐसी होरी में लग जाय आग, जानै कैसो चटक रंग डारौ...।
मंगलवार को ब्रज के राजा द्वारिकाधीश मंदिर में होली के उल्लास में श्रद्धालु मस्त हो गए। मंदिर में गुलाल की मार और ढप की थापों पर होरी के गीतों के स्वरों ने श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया।
प्रभु के साथ होली की मस्ती में श्रद्धालु थिरकने लगे। इस अवसर पर मंदिर अधिकारी श्रीधर चतुर्वेदी, दीनानाथ शर्मा, राकेश तिवारी, मुरलीधर, भोले, ब्रजेश, सुधीर, महेश, पंकज, अमित, सुरेश शर्मा आदि थे।