चूनर रंगे तो चल बरसाने गोरी...होरी आय गई मेरी वीर। ब्रजमंडल में चारों ओर होली की धूम मची है। श्रद्धालु ब्रजभूमि में चहुंओर रंग और गुलाल से अपने तनमन को सराबोर करने में लगे हैं।
बरसाना-नंदगांव की विश्व प्रसिद्ध लठामार होली 17 और 18 मार्च को होगी। देश-विदेश के श्रद्धालु इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। होली के दौरान दो कुंतल टेसू के फूलों का रंग और 500 बोरा गुलाल उड़ाया जाएगा।
टेसू के फूलों से हो रहा रंग तैयार
बरसाना और नंदगांव की होली में टेसू के फूलों का रंग का ही प्रयोग होता है। इसमें रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं होता। यह रंग चर्मरोग के लिए औषधि की तरह काम करता है। आचार्य मनोज कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि बरसाना और नंदगांव में होली के दौरान टेसू के फूलों से बनाया गया रंग डाला जाता है।
स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने राधाजी और उनकी सखियों के साथ टेसू के रंग से ही होली खेली थी। भगवानदास भंडारी ने बताया कि अभी से यहां दो कुंतल टेसू के फूलों का रंग तैयार किया जा रहा है।
बूढ़े और बारे, भये होरी में मतवारे
ब्रजभूमि में वसंत का डांढ़ा और फागुन की बयार बूढ़ों को भी जवान बना देती है। कमई के कमल सिंह रंग में सराबोर थे, जब उनसे पूछा गया कि यह रंग अभी से किसने डाल दिया। तब वे जोर से हंसे और बोले कि हमारी समधन ने हमारे ऊपर यह रंग डालौ है। हमऊ होली तक बाए गहरे रंग में रंगे बिना दम नाइउ लेंगें।
पंजाब से आई ललिता कहती हैं कि होली में हमारे ऊपर यदि कोई रंग या गुलाल नहीं डालता तो वे उसके सामने खड़ी हो जाती हैं। उनसे जबरदस्ती रंग डलवाती हैं। ब्रज की होली खेलने के लिए वह अपनी सखियों से बरबस ही बोल उठती हैं कि चूंनर रंगे तो चल बरसाने... होरी आय गई मेरी वीर।
यूक्रेन से आए भीमा और उनकी मां आनंदनि देवी दासी ने बताया बरसाना की होली में हम खूब आनंद लेते हैं। ऐसा महसूस होता है जैसे स्वयं राधाकृष्ण आज भी यहां होली खेलते हैं।