कैसौ ये देश निगोरा, सब जग होरी या ब्रज होरा...। बुधवार को प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर में फाग महोत्सव की शुरूआत के साथ ये पंक्तियां चरितार्थ होने लगीं। ब्रज की होरी देख बाहर से आए श्रद्धालु भी अपनी सुध-बुध खो बैठे। होरी गायन के दौरान इन श्रद्धालुओं ने गुलाल लगाया और नृत्य का आनंद उठाया।
प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर में बुधवार को सुबह राजभोग झांकी में 31 दिवसीय फाग महोत्सव की शुरुआत परंपरागत अंदाज में हुई। ढप की थाप पर रसिया मंडल के कलाकारों के सस्वर में होरी गायन से मंदिर प्रांगण में होली की मस्ती छा गई। इस दौरान श्रद्धालु भी आनंदित हो उठे।
ब्रजफाग द्वारिकेश रसिया मंडल के कलाकारों ने नगाड़े की थाप के साथ ‘आज बिरज में होरी रे रसिया, होरी रे रसिया बरजोरी रसिया’ का गायन किया। होरी गायन के बीच राजाधिराज की अनुपम छटा पर श्रद्धालु बलिहारी हो गए। इस दौरान एक दूसरे के चेहरों पर गुलाल लगाया और रसिया के स्वरों पर श्रद्धालु झूमने लगे। मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि यह आयोजन प्रतिदिन राजभोग दर्शन की झांकी में सुबह 10 से 11 बजे तक होगा। इस अवसर पर श्रीधर चतुर्वेदी, मुरली, दयानाथ, दीनानाथ, ऋषि बाबा, खटपटिया आदि थे।