फाग की मस्ती में सराबोर हुआ श्रीकृष्ण जन्मस्थान
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होली के गीत संगीत की स्वर लहरियों पर रंगभरनी एकादशी को श्रीकृष्ण जन्मस्थान झूम उठा। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बरसते फूलों ने भक्तों को आनंदित कर दिया। होली के रसिया घूंघट के पर्दा में गोरी भर पिचकारी मारुंगो..., नेक आगे आजा श्याम तोहि रंग डारूं... गीतों पर नृत्य करते कलाकारों के साथ कान्हा के भक्त भी नृत्य कर उठे।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बुधवार को रंगभरनी एकादशी के अवसर पर लठामार होली का आयोजन किया गया। ब्रज के साथ राजस्थान, हरियाणा से आए कलाकारों ने मंच पर रसिया और नृत्य के साथ होली के रंग भरे। कार्यक्रम की शुरूआत ब्रज वंदना ‘यही ब्रजधाम है विश्व का प्राण है...’ से हुई। नृत्य के साथ ब्रज के लोकगीत होली खेलुंगी श्याम तौते नाई मानुंगी... की प्रस्तुति ने उपस्थित समूह को होली की मस्ती में सराबोर कर दिया।
सिर पर कलश रख चरी नृत्य ने भक्तों को चकित किया तो वंदनाश्री के होली गीत पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। मयूर नृत्य के रूप में कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ‘आयौ रसिया मोर बन आयौ रसिया और आज होरी खेलन आए हैं नटवर नंद किशोर, श्रीगोवर्धन महाराज महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में मौजूद जनसमूह भी झूम उठा। चरकुला नृत्य और दीपक नृत्य ने लोगों को चकित किया तो कार्यक्रम के अंत में फूलों की होली खेलते हुए भक्त भी आनंदित होकर नाचने लगे। इस दौरान संपूर्ण जन्मस्थान परिसर लोगों से भरा रहा।
आसमान से उड़ा गुलाल, लाल भए बदरा
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आसमान से उड़ते रंग और गुलाल ने संपूर्ण वातावरण को होलीमय कर दिया। हर तरफ रंग ही रंग था। अभी श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लीला मंच पर चरकुला नृत्य और फूलों की होली का आनंद बरस रहा था कि रावल से आए हुरियारे और हुरियारिनों की लाठियों की गड़गड़ाहट अचानक सुनाई देने लगी। रंग गुलाल बरसने लगा। देखते ही देखते कुछ ही पलों में आम और खास सभी होली के रंग में रंग गए। हुरियारिनों की लाठियां हुरियारों पर बरसने लगीं। होली देखने आए लोग भी लठामार होली का हिस्सा बनते हुए खुद को हरियारिनों की लाठियों से बचाने लगे। होली का यह रंग श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर शाम छह बजे तक यूं ही बरसता रहा।