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संग्रहालय में योग के ऐतिहासिक साक्ष्य

Wed, 24 Jun 2015 12:01 AM IST
अजय खंडेलवाल, मथुरा
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योग भारतीय इतिहास का गौरव है। हमारे पूर्वज योग करके ऊर्जावान और स्वस्थ रहते थे। मथुरा के संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां इसे प्रमाणित करती हैं। गुप्त काल की एक मूर्ति में विदूषक रानी के सामने अनुलोम-विलोम और प्राणायाम करता नजर आ रहा है। वहीं कई काल खंड की मूर्तियां भी योग की मुद्राओं में नजर आती हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में लोगों का योग के प्रति उत्साह देखने के बाद इसकी प्राचीनता को लेकर दुनिया भर में बहस छिड़ गई। योग व्यक्ति को निरोग रखने में सहायक है, यह बात समझाई जाती है और इसके प्रमाण इतिहास में भी है। मथुरा स्थित राजकीय संग्रहालय में संजोकर रखी गई पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों में योग की कई मुद्राएं देखी जा सकती हैं।

यहां गुप्त काल (पांचवीं शताब्दी) की टेराकोटा की मूर्ति में एक विदूषक रानी के सामने प्राणायाम की मुद्रा में है। ये विदूषक अनुलोम विलोम और प्राणायाम करता नजर आ रहा है। इसके अलावा कुषाण काल, गुप्तकाल, बौद्धकाल, मौर्यकाल, शुंग काल सहित कई कालखंड की मूर्तियां में योगाभ्यास का वर्णन है।
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रानी के सवालों से बचने को अनुलोम-विलोम
संग्रहालय के सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने गुप्तकाल की टेराकोटा मूर्ति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में विदूषक (मसखरा) राजा के बेहद करीबी होते थे। मूर्ति में रानी विदूषक का दुपट्टा पकड़ कर राजा से जुड़ी कुछ राज की बातें जानने की कोशिश कर रही हैं। विदूषक इन सवालों से बचने के लिए अनुलोम-विलोम करता नजर आ रहा है।


राजकीय संग्रहालय में मौजूद दो हजार साल पुरानी मूर्तियों में कई मूर्तियों में योग की मुद्राएं दिखाई गई हैं। इनमें टेराकोटा की मूर्ति में विदूषक अनुलोम-विलोम का अभ्यास करता देखा जा सकता है।
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 डा. एसपी सिंह, सहायक निदेशक, राजकीय संग्रहालय मथुरा
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