भक्त प्रहलाद का ध्यान कर हीरालाल पंडा ने पहली बार धधकती होलिका से निकलने की परंपरा का निर्वहन किया। शुक्रवार तड़के चार बजे पंडा प्रहलाद कुंड से निकला और दस फुट ऊंची बनी होलिका की प्रचंड ज्वाला, अंगारों से सकुशल गुजर गया।
भक्ति की शक्ति के साक्षात दृश्य के साथ भक्त प्रहलाद के जयघोष से पूरा फालैन गांव गुंजायमान हो उठा।
होली से शुरू होकर पंडा मेला पूरे दिन-रात चला। दिनभर गांव में अबीर-गुलाल के मध्य चौपाइयों का गायन किया गया। पिछले एक माह से प्रहलाद मंदिर पर परिवार और अन्न का त्यागकर पंडा भगवान विष्णु की पूजा कर रहे थे। उन्होंने हवन-यज्ञ और पूजा-पाठ किया।
जैसे ही दीपक की लौ ठंडी लगी पंडा प्रहलाद कुंड में स्नान के लिए पहुंचे। उनकी बहन भी कुंड से लोटा में पानी भरकर होलिका के समीप पहुंच गई और उसने अग्नि पर जल छिड़का। भगवान विष्णु का जयघोष कर हीरालाल पंडा जलते अंगारों से गुजर गए।
इससे पहले बाबूलाल पंडा इस परंपरा का तीन बार निर्वहन कर चुके हैं। उनकी उम्र अधिक होने से इस बार गांव में हुई पंचायत में हीरालाल पंडा को भक्त प्रह्लाद की माला पहनाई गई।