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तीज पर देश भर में खनकेगी मथुरा की पायल

Mon, 01 Aug 2016 11:25 PM IST
पुनीत शर्मा
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मथुरा की पायल - फोटो : अमर उजाला
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हरियाली तीज यानी महिलाओं के सजने संवरने का त्योहार। अब शृंगार का जिक्र छिड़े और पायल का नाम न आए यह तो हो ही नहीं सकता। पायल भी मथुरा की। तीजों पर यहां के कारीगरों की बनाई अट्ठा पायल की मांग सभी राज्यों से है। यहां बनने वाली फैंसी पायल का भी कोई जवाब नहीं है। हरियाली तीज से लेकर करवाचौथ तक इसकी बिक्री बढ़ती है लिहाजा कारीगर चांदी की पायल तैयार करने में जुट गए हैं।
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चांदी की बड़ी मंडियों में शुमार मथुरा में पायल का काम बड़े पैमाने पर होता है। यहां 800 से ज्यादा पायल के निर्माता हैं। 20 बड़े कारोबारियों ने तो अपने ब्रांड भी तय कर रखे हैं। इसी ब्रांड से इनकी पायल देश भर में जाती है। क्योंकि पांच अगस्त को हरियाली तीज है लिहाजा कारखानों में दिन-रात पायल तैयार की जा रही हैं।

कारोबारियों के अनुसार पूर्वांचल में अलग डिजाइन होती है, जबकि छत्तीसगढ़ और झारखंड में मोटी पायल का चलन है। बड़े शहरों में फैंसी पायल अधिक बिकती है। आर्डर के अनुसार ही पायल तैयार कराई जाती है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में गोरखपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, झांसी, कानपुर, आजमगढ़ से अट्ठा पाजेब की मांग सबसे ज्यादा होती है, क्योंकि यह भारी होती है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और जम्मू कश्मीर तक यहां से पायल पहुंच रही है।
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सराफा कमेटी के महामंत्री योगेश जौली का कहना है कि आगरा में भी पायल का बड़ा मार्केट है। कभी मथुरा सबसे आगे था, लेकिन कारोबार में आने वाली मंदी से बहुत असर पड़ा है। तीज से पायल की मांग बढ़ जाती है और करवाचौथ से दीपावली तक ज्यादा रहती है। वैसे तो यहां चांदी का बिछुवा, गले की जंजीर और अंगूठी भी बनाई जाती हैं, लेकिन पायल का काम सबसे बड़ा है।

250 से 500 ग्राम तक की पाजेब
पाजेब आमतौर पर 250 ग्राम से तीन सौ ग्राम तक पसंद करते हैं, लेकिन कुछ जगहों पर भारी पाजेब पहनने का भी चलन है। आधा किलोग्राम तक की पाजेब बनाई जाती है। झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार से भारी पाजेब के आर्डर आते हैं। कुछ जगह से ज्यादा घुंघरू वाली पाजेब मांगी जाती है, जबकि कुछ शहरों में डिजाइनदार की मांग अधिक होती है।
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