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ब्रज से लेकर काशी तक होली के रंग: बाबा विश्वनाथ के लिए भेजे रंग-गुलाल, श्रीकृष्ण के लिए आए कर्पूर भस्म और इत्र

Sat, 08 Mar 2025 09:13 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

भगवान श्रीकेशवदेव ने काशी विश्वनाथ धाम के लिए होली के रंग, गुलाल, बाबा के वस्त्र, प्रसाद आदि सामग्री भेजी। वहीं, काशी विश्वनाथ धाम से भी शोभायात्रा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के लिए होली महोत्सव के लिए भेंट आ रही है।
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निकाली गई शोभायात्रा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान से भगवान श्रीकेशवदेव ने काशी विश्वनाथ धाम के लिए होली के रंग, गुलाल, बाबा के वस्त्र, प्रसाद आदि सामग्री भेजी। शनिवार को भव्य शोभायात्रा के बीच यह रवाना हुई। इसी क्रम में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा काशी से भी भगवान श्रीकृष्ण के होली उत्सव के लिए कर्पूर भस्म, सुगंधित इत्र, वस्त्र एवं प्रसाद आदि सामग्री भेजी गई है।
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होली की परंपरागत वाद्य यंत्रों पर झूमते, नाचते एवं होली गायन करते श्रद्धालु व ब्रजवासी काशी विश्वनाथ की गुलाल यात्रा में सम्मिलित होकर अभिभूत थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी एवं अन्य पदाधिकारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ जा रही ऐसी अनूठी पहल को लेकर उत्साहित थे।

शोभायात्रा भव्य सुसज्जित वाहन में सुबह काशी विश्वनाथ धाम के लिए रवाना हुई। संस्थान के पूजाचार्य राम अवतार अवस्थी, शशांक गर्ग, ब्रजकिशोर अग्रवाल, पवन अग्रवाल, गोपाल भगवान के रंग, गुलाल एवं प्रसाद को लेकर काशी के लिए रवाना हुए। 
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गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इसी क्रम में काशी विश्वनाथ धाम से भी शोभायात्रा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के लिए होली महोत्सव के लिए भेंट आ रही है। काशी विश्वनाथ धाम से आने वाली यात्रा को मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी निखलेश कुमार मिश्र, उप जिला मजिस्ट्रेट शंभू शरण ने पूजन-अर्चन के बाद मथुरा रवाना किया।

रंगभरनी एकादशी को उपयोग होगा परस्पर आदान-प्रदान का प्रसाद
जिस ब्रज भाव और होली के आनंद को प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने गोपी रूप धारण किया, आज उसी होली लीला की प्रसादी को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ धाम भेजा गया है। क्योंकि काशी विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण-जन्मभूमि पर होली का मुख्य आयोजन रंगभरनी एकादशी के दिन होता है। इसलिए काशी व श्रीकृष्ण-जन्मभूमि के प्रमुख होली उत्सव में परस्पर आदान-प्रदान से प्राप्त दिव्य प्रसाद का उपयोग होगा।
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