पावन धाम वृंदावन स्थित ठाकुर श्रीराधा स्नेह बिहारी मंदिर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य धार्मिक आयोजन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर ठाकु जी महाराज का पाटोत्सव तथा भगवान परशुराम के आविर्भाव महोत्सव का संयुक्त आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर ठाकुर जी के चरण दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के अध्यक्ष आचार्य करण कृष्ण गोस्वामी के नेतृत्व में विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। सर्वप्रथम ठाकुर जी की भव्य शृंगार आरती की गई, जिसके दर्शन कर भक्तगण भाव-विभोर हो उठे। इसके पश्चात भगवान परशुराम जी के चित्रपट का पूजन वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराया गया। वातावरण में गूंजते मंत्रों और भक्ति रस से ओतप्रोत इस आयोजन ने सभी को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।
भगवान परशुराम जी को माल्यार्पण करने के बाद दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इसके उपरांत उपस्थित विद्वानों और धर्माचार्यों ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने उनके तप, त्याग और धर्म रक्षा के संकल्प को आज के समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर आचार्य करण कृष्ण गोस्वामी एवं अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा ब्रज प्रदेश अध्यक्ष पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ ने सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए 101 विप्रों तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को स्मृति चिन्ह एवं उपहार वितरित किए। इस सेवा कार्य को उपस्थित लोगों ने सराहा और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्ति और उल्लास के वातावरण से सराबोर रहा। भक्तों ने भजन-कीर्तन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और ठाकुर जी के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। आयोजन में संत रामदास जी महाराज, कन्हैया लाल गौतम, बालसुक पुंडरीक, चंदन लाल शर्मा, अजय शर्मा, रमेश चंद्र गौतम, बालोपंडित, रामबाबू शर्मा, संजय शर्मा, ब्रजेश गिरी, गिरिराज शरण शर्मा, पप्पू सरदार, ईश्वर चंद्र रावत, राजेश पाठक, विष्णु शर्मा, गोविंद शर्मा, प्रदीप गोस्वामी, कृष्ण मुरारी शर्मा, देवेंद्र गौतम सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
समापन पर प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा भाव का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।