प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि मथुरा और वृंदावन की पहचान देश विदेश में मंदिरों के लिए है। लेकिन पिछले दिनों हुई घटना ने मथुरा को बदनाम कर दिया है। हालांकि कहा जाता है कि यह सारी भूमि गोपाल की है लेकिन ढाई साल तक गोपाल की भूमि पर अवैध कब्जा रहा। इस अतिक्रमण को हटवाने के लिए हुआ नरसंहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
वृंदावन के राधा निवास स्थित वरदराज कुंज बड़ा खटला में आयोजित महासंप्रोक्षण महोत्सव में संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा क्यों और कैसे हुआ इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता लेकिन इस जमीन को खाली कराने के लिए जो इतने लोग मरे वह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर पहले कोशिश की गई होती तो शायद आज यह हालात न होते। किसकी गलती थी और क्या सजा मिलेगी यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा मगर सरकारों को चाहिए कि वह सरकारी संपत्तियों को सहेजने के लिए ठोस प्लान बनाए।
धार्मिक स्थलों की भूूमि की सुरक्षा को भी मजबूत प्लानिंग होनी चाहिए। ऐसा न हो कि जिसका मन किया उसने सरकारी भूमि पर तंबू गाढ़ दिया। जो शहर कभी मंदिरों के लिए जाना जाता था। वह जवाहर बाग हिंसा में बदनाम हो गया है। हर जगह जवाहर बाग को लेकर चर्चा होती है। मथुरा का नाम आते ही लोग कहने लगते हैं कि वही जवाहर बाग वाला शहर।
न्यायिक जांच में तय हो जाएगा दोष
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि पूरे मामले की न्यायिक जांच चल रही है। सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया है। जांच शुरू भी हो गई होगी। जिसका भी दोष होगा वह तय हो जाएगा। न्यामूर्ति उच्च न्यायालय के हैं। वह अपने ढंग से जांच करेंगे। उसके बारे में कुछ बोलना ठीक नहीं है। क्योंकि राज्यपाल की अपनी गरिमा होती है उसके कारण अधिक बोलना उचित नहीं है।