स्ट्राइक वन कोर ने गोल्डन जुबली आयोजन में बुधवार की रात लाइट एंड साउंड शो में शौर्य और सामर्थ्य की गाथा बताई गई। स्ट्राइक वन की उत्कृष्ट उपलब्धियों को समर्पित ‘सागा ऑफ स्ट्राइक वन: स्ट्राइक वन की गौरव गाथा’ नामक ‘लाइट एंड साउंड शोÓ में कोर के जवानों ने 1965 और 1971 की लड़ाई का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। इनसे संबंधित फिल्म भी सैनिक परिवारों को दिखाई गई। जनरल ऑफिसर कमांडिंग स्ट्राइक वन लेफ्टिनेंट जनरल एबी शिवाने नेे भी 50 साल के दौरान लिखी गई इस गाथा के कुछ पन्नों को सामने रखा।
लेफ्टिनेंट जनरल एबी शिवाने नेे बताया कि 1965 से लेकर आज तक चाहे युद्ध का मैदान हो या प्राकृतिक आपदा, स्ट्राइक वन सदा देश की सेवा के लिए तत्पर रही है। स्ट्राइक वन की इस महान उपलब्धियों का श्रेय इसके वीर जवानों के त्याग और निष्ठा को जाता है। स्ट्राइक वन ने विभिन्न युद्धों में तीन परमवीर चक्र, 17 महावीर चक्र और 71 वीर चक्र अर्जित किए। इस कोर के हर सैनिक के सिद्धांत ‘नेशन बिफोर सेल्È¤Ó राष्ट्र सर्वोपरि को दर्शाता है।
सैन्य क्षेत्र में हुए लाइट एंड साउंड शो ‘स्ट्राइक वन की गौरव गाथा’ कार्यक्रम में उप राज्यपाल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह, आर्मी कमांडर दक्षिण-पश्चिम कमांड लेफ्टिनेंट जनरल एके साहनी सहित कई सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में हुई आतिशबाजी ने कार्यक्रम में रोमांच भर दिया।
बचाव कार्य में सबसे आगे
मथुरा। वाकया 21 अक्तूबर, 2008 की तड़के पांच बजे की है। दिल्ली की ओर जा रही मेवाड़ एक्सप्रेस में पीछे से गोवा एक्सप्रेस ने टक्कर मार दी। गोवा एक्सप्रेस के इंजन ने पीछे की जनरल की दो और एक स्लीपर की बोगी को तहस-नहस कर दिया। तीन घंटे तक जब बोगियों में फंसे लोगों को निकालने में पुलिस-प्रशासन को सफलता नहीं मिली तो सेना की मदद मांगी गई। तत्काल 12 से अधिक वाहनों में गाड़ी काटने के औजार, जनरेटर साथ लेकर पहुंचे स्ट्राइक वन कोर के जवान पहुंचे। दो घंटे तक चले बचाव कार्य में क्षतिग्रस्त बोगियों को काटकर घायलों को निकाला गया। हालांकि तब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी थी।