रंगनाथ मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोसव के अंतर्गत शुक्रवार को भगवान गोदारंगमन्नार की पालकी सवारी निकालने के साथ भगवान को पुष्पकरणी कुंड में स्नान कराया गया। इस दौरान आराध्य के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
सुबह आठ बजे दक्षिण भारत से आए वेदपाठी पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को रजत पालकी में विराजमान कराया। भगवान के पालकी में विराजमान होते ही समूचा मंदिर परिसर भगवान गोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पालकी सवारी बैंड बाजों के साथ मंदिर से प्रारंभ होकर पत्थरपुरा और गोपीनाथ बाजार होते हुए प्राचीन केशीघाट पहुंची। इस दौरान शोभायात्रा में भक्तिमय धुनों पर श्रद्धालु थिरकते हुए चल रहे थे। संस्कृत विद्यार्थी मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे। जगह-जगह आरती और पुष्पवर्षा कर भगवान की पालकी सवारी का स्वागत किया।
प्राचीन केशीघाट पहुंचने पर मंदिर सेवायतों ने भगवान गोदारंगमन्नार को मां यमुना के दर्शन कराए। पंडितों ने मां यमुना और गोदा रंगमन्नार की आरती भी उतारी। इसके बाद सवारी गोपेश्वर मार्ग, ज्ञानगुदड़ी, ब्रह्मकुंड होते हुए दोबारा मंदिर पहुंची। जहां मंदिर परिसर में बने पुष्पकरणी कुंड पर भगवान गोदारंगमन्नार के स्नान दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। मंदिर सेवायत भगवान के श्रीविग्रह को पालकी से उतारकर कुंड तक लाए। भगवान गोदारंगमन्नार को वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य प्रतीकात्मक रूप से स्नान कराया।