किशोर मन के निर्णय से परिवार की बंदिशें तोड़ घर छोड़ने वाली सपना को आखिर परिवार की अहमियत समझ आ गई। करीब डेढ़ साल तक औरों के साथ मिले अनुभव ने उसे सब कुछ दिया पर अपनों की कमी हमेशा खली। इसलिए कभी पढ़ाई में अव्वल रही छात्रा अब घर लौटना चाहती है। पुलिस ने उसकी आपबीती सुन परिवार वालों को सूचना दे दी है।
उत्तराखंड हल्द्वानी के लालकुंआ की रहने वाली सपना सिंह ने बताया कि वर्ष 2013 में उसने हाईस्कूल में 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। वह पढ़ने में हमेशा अव्वल रही लेकिन पेपर मिल में कार्यरत पिता हुकुम सिंह और बड़े भाई की बंदिशें उसे बुरी लगतीं थीं। सपना के अनुसार परिवार को उसका जींस पहनना, बाल खुले रखना और सहेलियों के साथ घूमना अच्छा नहीं लगता था। हालांकि, मां किलादेवी उसका पक्ष रखतीं थीं लेकिन पिता और बड़े भाई के आगे उनका भी बस नहीं चलता था। कई बार तो वे सपना को पीटते भी थे।
सपना ने यह सब सहन तो किया लेकिन किशोर मन में गुस्सा पनप रहा था। इसी के चलते वर्ष 2014 में पिता और भाइयों से झगड़े के बाद वह चुपचाप घर से चली आई। सपना ने बताया कि हल्द्वानी से वह बरेली पहुंची। यहां उसकी मुलाकात एक मुस्लिम महिला साहिमा से हुई। उसने सपना को आसरा दिया। साहिमा के पति की कपड़ों की दुकान थी और उनका 13 वर्षीय बेटा इबाद हॉस्टल रहकर पढ़ाई करता था।
सपना ने बताया कि वैसे साहिमा आंटी उसका बेहद ख्याल रखतीं थीं, लेकिन नौकरानी के न आने पर घर की सफाई और बर्तन आदि भी साफ करातीं। इसलिए वह बरेली में रही तो लेकिन कुछ दिन बाद ही परिवार याद आने लगी। कई दिन हो जाने और पिता-भाई के डर से वह संपर्क की हिम्मत नहीं जुटा पाई। सपना का कहना है कि बीते दिनों साहिमा आंटी उसे वृंदावन के स्कूल में दाखिला कराने और घूमने की कहकर वृंदावन छोड़ र्गइं।
इसके बाद वह यहां आश्रय सदन में आ गई। आश्रय सदन के कर्मचारियों ने पुलिस को सपना के बारे में बताया। इस पर पुलिस ने उससे सारी जानकारी ली। इस दौरान सपना ने बताया कि वह अब घर जाना चाहती है। अब जैसा उसके भाई और पिता कहेंगे, वह वैसा ही करेगी। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि सपना के पिता को सूचना दे दी गई है। वह गुरुवार को वृंदावन के लिए रवाना हो गए थे।
अंधविश्वास रास नहीं आया
सपना ने बताया कि दो साल पहले उसके परिवारीजन उसके ऊपर भूत का साया होने की बात कहते हुए महिला तांत्रिक को घर ले आए थे। कई दिन तक पूजा और तंत्र विद्या चली। उसे यह अंधविश्वास भी रास नहीं आया। तभी उसने घर छोड़ने का मन बना लिया था।