मथुरा। कान्हा की नगरी में जेन-जी की बढ़ती भक्ति और आस्था को अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की ताकत बनाया जाएगा। सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हिंदू पक्षकारों ने युवा वर्ग को इस आंदोलन की रीढ़ मानते हुए एक बड़े जन-जागरण अभियान की योजना बनाई है। इसके तहत वृंदावन में बुधवार को कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं, संतों, अखाड़ों और महिलाओं को एक मंच पर जोड़ा जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मथुरा-वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं में सबसे अधिक संख्या जेन-जी की है। दिल्ली-एनसीआर, जयपुर, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर और मुंबई जैसे बड़े शहरों से हर सप्ताहांत युवाओं की टोलियां कान्हा के दर्शन के लिए पहुंच रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदू पक्षकारों ने मुक्ति आंदोलन का दायरा बढ़ाने की रणनीति बनाई है। बुधवार को वृंदावन में होने वाले भव्य कार्यक्रम के बाद अभियान को गति देने के लिए विभिन्न स्कूल-कॉलेजों में संपर्क कर युवाओं को जागरूक किया जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और हिंदू पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का प्रकरण वर्षों पुराना है। उनका दावा है कि 1670 से पहले विवादित भूमि पर शाही मस्जिद ईदगाह का कोई अस्तित्व नहीं था। उस समय केवल कटारादेव मंदिर और मूल गर्भगृह की दर्ज था। मुगल शासक औरंगजेब ने 1670 में मंदिर को तोड़ दिया था। इसके बाद से यहां पर विवाद शुरू हुआ। इस मामले में पहला वाद 15 मार्च 1832 को ईस्ट इंडिया कंपनी की नीलामी को चुनौती देने के लिए दायर किया गया था। तब अदालत ने हिंदू पक्ष के स्वामित्व को वैध माना था। बावजूद इसके यहां पर विवाद बना रहा।
12 अक्तूबर 1968 को श्रीकृष्ण सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत विवादित जमीन के कुछ हिस्से को मस्जिद प्रबंधन को ईदगाह के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। हिंदू पक्षकारों ने 1968 में हुए इस समझौते को पूरी तरह से अवैध बताते हुए न्यायालय की शरण ली। इस मामले में न्यायालय में कई याचिका दायर की गईं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने बताया कि 23 दिसंबर 2020 को न्यायालय ने उनका वाद स्वीकार किया। इस मामले में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अब मुक्ति आंदोलन से जेन-जी को जोड़ा जाएगा। इस प्रस्ताव को कुछ अन्य हिंदू पक्षकारों ने भी सहमति दी है। सभी का मानना है कि जेन-जी का बढ़ता प्रभाव श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन में निर्णायक साबित होगा। इसके लिए बुधवार को वृंदावन में कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें युवा वर्ग के साथ ही महिलाओं, संतों और अखाड़ों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम के बाद युवाओं को जोड़ने के लिए स्कूल-कॉलेजों में भी संपर्क किया जाएगा।