छाता/बरसाना। नंदगांव ब्लॉक के कमई गांव में श्मशान घाट पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव का मामला सामने आया है। बारिश के दौरान अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने में ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। श्मशान घाट पर टीनशेड या स्थायी छत नहीं होने के कारण परिजन और ग्रामीणों को एक घंटे बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ा। पार्थिव शरीर को तिरपाल के सहारे सुरक्षित रखा गया।
थाना बरसाना क्षेत्र के गांव कमई निवासी सुखदा (80) का निधन हो गया था। निधन के बाद परिजन और ग्रामीण अंतिम यात्रा लेकर गांव के श्मशान घाट पहुंचे। अंतिम संस्कार की तैयारियां चल ही रही थीं कि अचानक मौसम ने करवट बदली और तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट पर बारिश से बचाव के लिए कोई टीनशेड, छत या अन्य स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण वहां मौजूद लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई। अंतिम संस्कार की रस्में प्रभावित हो गईं और प्रक्रिया को रोकना पड़ा। शोकाकुल परिजनों और ग्रामीणों ने किसी तरह सूझबूझ का परिचय देते हुए पार्थिव शरीर को तिरपाल से ढककर सुरक्षित रखा।
करीब एक घंटे तक हुई बारिश के बाद मौसम सामान्य हुआ, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सकी। इस दौरान परिजनों और ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के श्मशान घाट पर लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बारिश और खराब मौसम के दौरान अंतिम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट पर जल्द से जल्द टीनशेड, छत और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कराई जाए। ग्रामीणों ने कहा कि अंतिम संस्कार एक संवेदनशील और जरूरी प्रक्रिया है, ऐसे में श्मशान घाट पर मौसम से बचाव की व्यवस्था होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।